August 2010
आंटी का मीठा मीठा दर्द
खाओ पियो चौड़े से
गनपत से अपनी प्यास बुझाई
चूत चुदाओ लौड़े से
तू तो कुछ कर-2
दो बहनों की चुदाई
प्यार का समां
प्यारी पूजा
प्यास से प्यार तक-2
प्रगति का समर्पण-2
भाभी और उसकी बहन को जयपुर में चोदा
मारी भाई की गांड
मेरी गर्लफ्रेंड दीपिका
मेरी गाण्ड भी मारी और ...-2
मैं क्या करूँ?-2
प्यारी पूजा
प्यारी पूजा
प्रेषक :राजा गर्ग
दोस्तों आज जो किस्सा आपको सुनाने जा रहा हूँ वो उस रात का है जब मैं समझ नहीं पाया कि वो सब हो कैसे गया। आज जब मैं उस रात के बारे में सोचता हूँ तो उलझन में पड़ जाता हूँ। दरअसल बात तब की है जब मैंने कॉलेज में दाखिला लिया था। तभी मेरी ममेरी बहन की शादी पड़ गई।
हम सब शादी में गए हुए थे और सगाई वाले दिन जब हम लड़के वालों के आने का इंतज़ार कर रहे थे। तभी उनकी गाड़ियाँ दरवाज़े पर आ कर रुकी और हम जीजाजी के साथ अन्दर जाने लगे। तभी पीछे मेरी मामी ने आवाज़ लगाई- राजन, पूजा अकेले सामान ला रही है, उसके साथ सामान उठा लाओ !
मैं गया और उसको देखा। शकल से एक औसत लड़की जिसकी फिगर कमाल की, साथ ही मम्मे भी इतने बड़े और उसके ब्लाऊज़ से झांकती वो जवानी, उसके वो गुलाबी होंठ ! मैं तो बस उसे देखता ही रह गया। वो मेरे जीजाजी की बहन थी।
खैर मैं उसके साथ अन्दर तक गया और मैंने देखा कि वो भी मुझे नोटिस कर रही थी। हमारी कई बार आखें मिली और एक खिंचाव सा पैदा हो गया हम दोनों के बीच में। हमने साथ में खूब खुशियाँ मनाई और खूब नाचे गाये।
जाते वक़्त मैंने हिम्मत करके पूजा का नंबर मांग लिया और उससे बातें करने लगा। शादी एक महीने बाद थी। तब तक मैंने पूजा को सेट कर लिया था। अब वो शायद मुझे पसंद करने लगी थी।
फिर शादी के दिन वो उस गुलाबी साड़ी में क्या लग रही थी, शादी में शायद ही कोई ऐसा मर्द हो जिसने उसे मुड़-2 कर न देखा हो।
फिर जब डांस करने की बारी आई तो मैंने पूजा के साथ बहुत देर तक डांस किया। डांस करते वक़्त कई बार मेरे हाथ उसके मम्मों पर छुए और वो सब समझ कर मुस्कुराने लगी लेकिन उस वक़्त तक मेरे मन में कोई खास पाप नहीं जागा था अगर वो खाना खाते वक़्त मुझे आँख मार के अलग आने के लिए नहीं कहती। उसने मुझे अलग बुलाया और बोली- मेरा यहाँ मन नहीं लग रहा है, कुछ देर बाहर घूम कर आएँ?
मैंने कहा- चलो !
मगर मैं एकदम से नहीं निकल सकता था इसलिए मौका पाकर मैंने अपनी गाड़ी में पहुँच कर उसे फ़ोन मिला दिया।
वो आ गई और हम गाड़ी में बैठ कर निकल लिए। सर्दी की रात थी और बर्फीली ठण्ड पड़ रही थी और उस बंदी(लड़की) को घूमना था। मेरी समझ में उसके सारे सिग्नल आ तो रहे थे मगर मन में यह डर था कि हम लड़की वाले थे, कोई ऊँच-नीच हो गई तो बदनामी हो जाएगी।
फिर हम मुख्य सड़क पर निकल आये और पूजा मेरे से बोली- इतनी देर तुम अन्दर बोर नहीं हो रहे थे क्या?
मैंने कहा- हाँ, हो तो रहा था मगर क्या कर सकते हैं, लड़की वाले हैं, लड़के वाले होते तो भाई की सालियों को ही छेड़ लेते !
वो बोली- तो मेरे साथ अन्दर इतनी देर से क्या कर रहे थे? कभी यहाँ हाथ, कभी वहाँ ?
मैं झेंप गया और वो बोली- मैं सब समझती हूँ !
मैंने गाड़ी अँधेरे एक साइड में लगा कर उससे कहा- समझती हो तो क्या ख्याल है?
वो बोली- मैं इतनी रात को तुम्हारे साथ सिर्फ घूमने थोड़े ही आई हूँ !
मैंने उसकी तरफ ध्यान से देखा और अचानक ही हम एक दूसरे की तरफ खिंचते चले गए और हमारे होंठ एक दूसरे से मिल गए। मैं उसके होंठों का रस पीने को बेताब था जैसे कि मेरी तमन्ना पूरी होने को थी।
बहुत देर तक उसके होंठ चूसने के बाद मैंने उसके ब्लाऊज़ के ऊपर से उसके मम्मों को सहलाना चालू किया। वो भी थोड़ी ना नुकुर के बाद मेरा साथ देने लगी। फिर मैंने अपने मुँह को उसकी छाती से लगाया और उसके जिस्म की प्यारी सी खुशबू लेने लगा। साथ ही उसकी भी सिसकियाँ चालू हो गई। मैं इस बात का पूरा ख्याल भी रख रहा था कि किसी पल पूजा को ऐसा न लगे कि मैं उसके साथ ज़बरदस्ती कर रहा हूँ।
फिर मैंने उसके ब्लाऊज़ के अन्दर हाथ डाला और ऐसा लगा जैसे किसी भट्टी के अन्दर हाथ दे दिया हो। उसका पूरा जिस्म जल रहा था। मैंने बिना मौका गंवाए बिना उसका ब्लाऊज़ ऊपर कर दिया और उसके मम्मो को सहला के उसके चुम्बन लेने लगा। कुछ देर बाद जब वो पूरी तरह मदहोश हो गई तब मैंने उसकी साड़ी ऊपर करनी चालू की। गाडी में जगह कम होने के कारण हमें थोड़ी परेशानी हो रही थी।
फिर मैंने उसकी चूत में हाथ डाला और पाया कि उसकी चूत बहुत पानी छोड़ चुकी थी और एकदम मुलायम और गरम थी। फिर उसने अपने हाथों से मेरी पेंट की जिप खोली और मेरा लंड को सहलाने लगी जोकि अब तक मूसल बन गया था। उसने मेरे लिंग की चुसाई करनी चालू की और मैं उसके बाकी कपड़े उतारने लगा। साथ ही मैंने उसके उन नरम चूचों का भी भरपूर आनंद लिया। हर तरह से मरोड़ के, चूस के दांतों से चबा के मैंने उन पर अपनी छाप छोड़ दी।
अब मैं जानता था कि देर करना सही नहीं है। पहले एक बार अपनी छाप लड़की के अन्दर छोड़ दो, फिर बाकी काम तो बाद में होते रहेंगे।
मैंने उसकी सीट पीछे को लिटा दी और उसकी पैंटी को साइड कर के अपने लंड से उसका छेद सहलाने लगा।
और वो आहें भरते हुए बोली- फक्क मी नाओ !
और मैंने आहिस्ता से उसकी चूत में अपना लंड घुसा दिया। और वो एक प्यारी सी चीख के साथ पीछे हो गई।
मैंने अपना लंड बाहर निकल कर पूरी जान के साथ अन्दर तक डाल दिया मगर इस बार मुझे भी दर्द हुआ क्योंकि शायद उसकी झिल्ली फट गई थी इस बार और वो दर्द से छटपटा उठी।
मैंने फ़ौरन उसके होठों पर अपने होंठ रख दिए और उसे अपने से लिपटा लिया और उसके तुरंत बाद मैंने कुछ कागज़ सीट के ऊपर रख दिए ताकि अगर खून गिरे भी तो सीट गन्दी न हो।
फिर मैंने उससे पूछा- आगे बढ़ें?
उसने प्यार से मेरी तरफ देखा और बोली- थोड़ी देर और, बहुत मज़ा आ रहा है।
मेरे लिए तो अच्छी बात थी और मैंने उसकी चूत में दुबारा अपना लंड दिया और 5-6 धक्कों के बाद बोली- अब बस !
मेरा मन तो नहीं था, मुझे मानना पड़ा, रिश्तेदारी का सवाल था। और उसकी चूत में से अपना लंड निकाल कर साफ़ करने लगा।
वो बोली- अब मेरी चूत को थोड़ी देर चूसो !
मैंने उसकी चूत फिर एक कागज़ से साफ़ की और उसे चूसना चालू किया। फिर थोड़ी देर बाद मेरा ध्यान टाइम पर गया और मैंने उससे कहा- अब वापस चलना चाहिए !
वो बोली- ठीक है !
मैंने उसे गाड़ी से बाहर एक चक्कर मारने की सलाह दी ताकि उसकी चाल में कुछ सुधार आ जाये जोकि पहली बार चुदने के बाद बिगड़ जाती है।
वापस आकर हम दोनों चुपचाप जश्न में शामिल हो गए।
उसके बाद पूजा से मेरी लगभग रोज़ बातें होती थी और मेरे साथ फ़ोन पर सब तरह की बातें करती थी। वो हंस-2 कर बताती थी कि मैंने कल रात तुम्हारे नाम से मुठ्ठी मारी और बोलती कि उस दिन का काम पूरा करने कब आओगे।
फिर कुछ दिन बाद मैं अपने जीजाजी के घर किसी काम से गया और मुझे रात को वहीं रुकना था। घर पर सिर्फ जीजाजी, दीदी, पूजा और उसकी मम्मी थी।
अचानक ही रात को जीजाजी को फ़ोन आया कि उनके दोस्त की मम्मी गुज़र गई है तो उन्हें जाना पड़ा। मेरी दीदी भी साथ चली गई। दीदी की सास तो नौ बजते ही सो जाती थी। मुझे मौका मिल गया। हमने कंप्यूटर में फिल्म चलाई और देखने लगे। सर्दी थी और वो एक बड़ा सा कम्बल लाकर मेरे बगल में ही बैठ गई। पिक्चर का नाम "जूली" था, जिसमें नेहा धूपिया ने क्या दृश्य दिए थे। पूजा मेरी बगल में बैठी थी और जब पहला चुम्बन दृश्य आया तो मुझे शादी की वो रात ध्यान आ गई।
फिर अचानक मेरे घर से फ़ोन और मैं बाहर गया और वापस आकर कम्बल में घुस गया तो मैंने पाया कि पूजा ने अपनी जींस उतार रखी थी और वो सिर्फ पेंटी में रजाई के अन्दर थी। मैं अपना आपा खो रहा था और पूजा मुझे उकसाए जा रही थी। थोड़ी देर बाद एक दृश्य में डर लगने के बहाने पूजा मेरे से एकदम सट गई और मैं अपने आपको रोक नहीं पाया और उसकी टांगों को सहलाना चालू कर दिया। फिर मैंने अपना एक हाथ टॉप के अन्दर डाल दिया और दूसरे हाथ से उसकी चूत मसलता रहा। जब तक मूवी खत्म हुई, मैंने पूजा के जिस्म को मसल-मसल कर लाल कर दिया था और उसकी सारी लिपस्टिक खा चुका था।
जैसे ही पिक्चर ख़त्म हुई पूजा ने उठ कर कंप्यूटर बंद किया, दरवाज़ा बंद किया और आकर मेरी रजाई में फिर घुस गई।
मैंने कहा- यहाँ कुछ नहीं करते !
तो वो बोली- कोई फर्क नहीं पड़ता, मम्मी तो अब सो गई, वो सुबह ही उठेगी।
यह कह कर मेरा हाथ अपने मम्मों पर सहलाने लगी। असल वो मेरे सहलाने से गर्म हो चुकी थी और अब बस चुदना चाहती थी।
तो मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया, उसकी गांड के नीचे एक तकिया रखा और सीधा उसकी चूत में अपना लंड डाल दिया और सोचा कि कुछ धक्कों के बाद यह मान जाएगी मगर मुझे क्या मालूम था कि उसने अपनी चूत में गाजर और मूली दे-दे कर अपनी चूत को चुदक्कड़ बना दिया था।
मैं उसे धक्के मारता रहा और वो मज़े लेती रही, हर दस मिनट के ब्रेक के बाद फिर चालू हो जाती।
फिर थोड़ी देर बाद मैंने सोचा- यह ऐसे नहीं मानेगी, मैंने उसे उसकी गांड मारने के लिए राज़ी कर लिया।वो नादान मान गई और बोली- ठीक है ! यह भी करके देख लेते हैं !
मैंने कहा- ठीक है, मगर ज्यादा शोर मत मचाना, तुम्हारी मम्मी जाग जाएगी।
वो बोली- ठीक है !
मैंने पहले उसकी गांड में अपनी दो उँगलियाँ डाल के देखा कि उसका छेद बहुत ढीला था। मैंने उसे उसका छेद टाईट करने के लिए कहा और अपना लंड उसकी गांड के अन्दर डालना चालू किया आहिस्ता-2 !
वो सिसकियाँ भरने लगी और और शायद उसे दर्द भी हो रहा था। फिर मैंने अपना लंड बाहर निकाला और एक ही झटके में अन्दर तक डाल दिया वो बड़ी तेज़ी से चीखी और मैंने उसका मुंह अपने हाथों से बंद कर दिया। मैंने कई धक्के मारे उसकी गांड में, जिससे उसे बहुत दर्द हुआ पर मैंने सोचा कि उसे सबक तो सिखाना ही पड़ेगा।
थोड़ी देर बाद मैंने अपना लंड उसकी गांड से निकला और उसे बिस्तर पर सीधा लिटा दिया और उसकी एक टांग उठा के अपने कंधे पे रखी और उसकी चूत में अपना लंड बाड़ दिया और बहुत देर तक उसको मैंने चोद। उस बंदी ने भी हार नहीं मानी और हद से ज्यादा दर्द के बाद भी वो मेरा साथ देती रही। शायद इसी को हवस कहते हैं।
मैंने फिर उसे घोड़ी बनाया और फ़िर उसकी चूत में अपना लंड बाड़ दिया। अब वो निढाल हो चुकी थी और शायद इससे ज्यादा झेल नहीं पाती, तो मैंने उसे छोड़ दिया और उसके बगल में लेट कर उसके चुम्बन लेने लगा। अब मैं भी थक रहा था और सोना चाहता था और हम दोनों सोने चले गए।
coolrajaforever@gmail.com
प्रेषक :राजा गर्ग
दोस्तों आज जो किस्सा आपको सुनाने जा रहा हूँ वो उस रात का है जब मैं समझ नहीं पाया कि वो सब हो कैसे गया। आज जब मैं उस रात के बारे में सोचता हूँ तो उलझन में पड़ जाता हूँ। दरअसल बात तब की है जब मैंने कॉलेज में दाखिला लिया था। तभी मेरी ममेरी बहन की शादी पड़ गई।
हम सब शादी में गए हुए थे और सगाई वाले दिन जब हम लड़के वालों के आने का इंतज़ार कर रहे थे। तभी उनकी गाड़ियाँ दरवाज़े पर आ कर रुकी और हम जीजाजी के साथ अन्दर जाने लगे। तभी पीछे मेरी मामी ने आवाज़ लगाई- राजन, पूजा अकेले सामान ला रही है, उसके साथ सामान उठा लाओ !
मैं गया और उसको देखा। शकल से एक औसत लड़की जिसकी फिगर कमाल की, साथ ही मम्मे भी इतने बड़े और उसके ब्लाऊज़ से झांकती वो जवानी, उसके वो गुलाबी होंठ ! मैं तो बस उसे देखता ही रह गया। वो मेरे जीजाजी की बहन थी।
खैर मैं उसके साथ अन्दर तक गया और मैंने देखा कि वो भी मुझे नोटिस कर रही थी। हमारी कई बार आखें मिली और एक खिंचाव सा पैदा हो गया हम दोनों के बीच में। हमने साथ में खूब खुशियाँ मनाई और खूब नाचे गाये।
जाते वक़्त मैंने हिम्मत करके पूजा का नंबर मांग लिया और उससे बातें करने लगा। शादी एक महीने बाद थी। तब तक मैंने पूजा को सेट कर लिया था। अब वो शायद मुझे पसंद करने लगी थी।
फिर शादी के दिन वो उस गुलाबी साड़ी में क्या लग रही थी, शादी में शायद ही कोई ऐसा मर्द हो जिसने उसे मुड़-2 कर न देखा हो।
फिर जब डांस करने की बारी आई तो मैंने पूजा के साथ बहुत देर तक डांस किया। डांस करते वक़्त कई बार मेरे हाथ उसके मम्मों पर छुए और वो सब समझ कर मुस्कुराने लगी लेकिन उस वक़्त तक मेरे मन में कोई खास पाप नहीं जागा था अगर वो खाना खाते वक़्त मुझे आँख मार के अलग आने के लिए नहीं कहती। उसने मुझे अलग बुलाया और बोली- मेरा यहाँ मन नहीं लग रहा है, कुछ देर बाहर घूम कर आएँ?
मैंने कहा- चलो !
मगर मैं एकदम से नहीं निकल सकता था इसलिए मौका पाकर मैंने अपनी गाड़ी में पहुँच कर उसे फ़ोन मिला दिया।
वो आ गई और हम गाड़ी में बैठ कर निकल लिए। सर्दी की रात थी और बर्फीली ठण्ड पड़ रही थी और उस बंदी(लड़की) को घूमना था। मेरी समझ में उसके सारे सिग्नल आ तो रहे थे मगर मन में यह डर था कि हम लड़की वाले थे, कोई ऊँच-नीच हो गई तो बदनामी हो जाएगी।
फिर हम मुख्य सड़क पर निकल आये और पूजा मेरे से बोली- इतनी देर तुम अन्दर बोर नहीं हो रहे थे क्या?
मैंने कहा- हाँ, हो तो रहा था मगर क्या कर सकते हैं, लड़की वाले हैं, लड़के वाले होते तो भाई की सालियों को ही छेड़ लेते !
वो बोली- तो मेरे साथ अन्दर इतनी देर से क्या कर रहे थे? कभी यहाँ हाथ, कभी वहाँ ?
मैं झेंप गया और वो बोली- मैं सब समझती हूँ !
मैंने गाड़ी अँधेरे एक साइड में लगा कर उससे कहा- समझती हो तो क्या ख्याल है?
वो बोली- मैं इतनी रात को तुम्हारे साथ सिर्फ घूमने थोड़े ही आई हूँ !
मैंने उसकी तरफ ध्यान से देखा और अचानक ही हम एक दूसरे की तरफ खिंचते चले गए और हमारे होंठ एक दूसरे से मिल गए। मैं उसके होंठों का रस पीने को बेताब था जैसे कि मेरी तमन्ना पूरी होने को थी।
बहुत देर तक उसके होंठ चूसने के बाद मैंने उसके ब्लाऊज़ के ऊपर से उसके मम्मों को सहलाना चालू किया। वो भी थोड़ी ना नुकुर के बाद मेरा साथ देने लगी। फिर मैंने अपने मुँह को उसकी छाती से लगाया और उसके जिस्म की प्यारी सी खुशबू लेने लगा। साथ ही उसकी भी सिसकियाँ चालू हो गई। मैं इस बात का पूरा ख्याल भी रख रहा था कि किसी पल पूजा को ऐसा न लगे कि मैं उसके साथ ज़बरदस्ती कर रहा हूँ।
फिर मैंने उसके ब्लाऊज़ के अन्दर हाथ डाला और ऐसा लगा जैसे किसी भट्टी के अन्दर हाथ दे दिया हो। उसका पूरा जिस्म जल रहा था। मैंने बिना मौका गंवाए बिना उसका ब्लाऊज़ ऊपर कर दिया और उसके मम्मो को सहला के उसके चुम्बन लेने लगा। कुछ देर बाद जब वो पूरी तरह मदहोश हो गई तब मैंने उसकी साड़ी ऊपर करनी चालू की। गाडी में जगह कम होने के कारण हमें थोड़ी परेशानी हो रही थी।
फिर मैंने उसकी चूत में हाथ डाला और पाया कि उसकी चूत बहुत पानी छोड़ चुकी थी और एकदम मुलायम और गरम थी। फिर उसने अपने हाथों से मेरी पेंट की जिप खोली और मेरा लंड को सहलाने लगी जोकि अब तक मूसल बन गया था। उसने मेरे लिंग की चुसाई करनी चालू की और मैं उसके बाकी कपड़े उतारने लगा। साथ ही मैंने उसके उन नरम चूचों का भी भरपूर आनंद लिया। हर तरह से मरोड़ के, चूस के दांतों से चबा के मैंने उन पर अपनी छाप छोड़ दी।
अब मैं जानता था कि देर करना सही नहीं है। पहले एक बार अपनी छाप लड़की के अन्दर छोड़ दो, फिर बाकी काम तो बाद में होते रहेंगे।
मैंने उसकी सीट पीछे को लिटा दी और उसकी पैंटी को साइड कर के अपने लंड से उसका छेद सहलाने लगा।
और वो आहें भरते हुए बोली- फक्क मी नाओ !
और मैंने आहिस्ता से उसकी चूत में अपना लंड घुसा दिया। और वो एक प्यारी सी चीख के साथ पीछे हो गई।
मैंने अपना लंड बाहर निकल कर पूरी जान के साथ अन्दर तक डाल दिया मगर इस बार मुझे भी दर्द हुआ क्योंकि शायद उसकी झिल्ली फट गई थी इस बार और वो दर्द से छटपटा उठी।
मैंने फ़ौरन उसके होठों पर अपने होंठ रख दिए और उसे अपने से लिपटा लिया और उसके तुरंत बाद मैंने कुछ कागज़ सीट के ऊपर रख दिए ताकि अगर खून गिरे भी तो सीट गन्दी न हो।
फिर मैंने उससे पूछा- आगे बढ़ें?
उसने प्यार से मेरी तरफ देखा और बोली- थोड़ी देर और, बहुत मज़ा आ रहा है।
मेरे लिए तो अच्छी बात थी और मैंने उसकी चूत में दुबारा अपना लंड दिया और 5-6 धक्कों के बाद बोली- अब बस !
मेरा मन तो नहीं था, मुझे मानना पड़ा, रिश्तेदारी का सवाल था। और उसकी चूत में से अपना लंड निकाल कर साफ़ करने लगा।
वो बोली- अब मेरी चूत को थोड़ी देर चूसो !
मैंने उसकी चूत फिर एक कागज़ से साफ़ की और उसे चूसना चालू किया। फिर थोड़ी देर बाद मेरा ध्यान टाइम पर गया और मैंने उससे कहा- अब वापस चलना चाहिए !
वो बोली- ठीक है !
मैंने उसे गाड़ी से बाहर एक चक्कर मारने की सलाह दी ताकि उसकी चाल में कुछ सुधार आ जाये जोकि पहली बार चुदने के बाद बिगड़ जाती है।
वापस आकर हम दोनों चुपचाप जश्न में शामिल हो गए।
उसके बाद पूजा से मेरी लगभग रोज़ बातें होती थी और मेरे साथ फ़ोन पर सब तरह की बातें करती थी। वो हंस-2 कर बताती थी कि मैंने कल रात तुम्हारे नाम से मुठ्ठी मारी और बोलती कि उस दिन का काम पूरा करने कब आओगे।
फिर कुछ दिन बाद मैं अपने जीजाजी के घर किसी काम से गया और मुझे रात को वहीं रुकना था। घर पर सिर्फ जीजाजी, दीदी, पूजा और उसकी मम्मी थी।
अचानक ही रात को जीजाजी को फ़ोन आया कि उनके दोस्त की मम्मी गुज़र गई है तो उन्हें जाना पड़ा। मेरी दीदी भी साथ चली गई। दीदी की सास तो नौ बजते ही सो जाती थी। मुझे मौका मिल गया। हमने कंप्यूटर में फिल्म चलाई और देखने लगे। सर्दी थी और वो एक बड़ा सा कम्बल लाकर मेरे बगल में ही बैठ गई। पिक्चर का नाम "जूली" था, जिसमें नेहा धूपिया ने क्या दृश्य दिए थे। पूजा मेरी बगल में बैठी थी और जब पहला चुम्बन दृश्य आया तो मुझे शादी की वो रात ध्यान आ गई।
फिर अचानक मेरे घर से फ़ोन और मैं बाहर गया और वापस आकर कम्बल में घुस गया तो मैंने पाया कि पूजा ने अपनी जींस उतार रखी थी और वो सिर्फ पेंटी में रजाई के अन्दर थी। मैं अपना आपा खो रहा था और पूजा मुझे उकसाए जा रही थी। थोड़ी देर बाद एक दृश्य में डर लगने के बहाने पूजा मेरे से एकदम सट गई और मैं अपने आपको रोक नहीं पाया और उसकी टांगों को सहलाना चालू कर दिया। फिर मैंने अपना एक हाथ टॉप के अन्दर डाल दिया और दूसरे हाथ से उसकी चूत मसलता रहा। जब तक मूवी खत्म हुई, मैंने पूजा के जिस्म को मसल-मसल कर लाल कर दिया था और उसकी सारी लिपस्टिक खा चुका था।
जैसे ही पिक्चर ख़त्म हुई पूजा ने उठ कर कंप्यूटर बंद किया, दरवाज़ा बंद किया और आकर मेरी रजाई में फिर घुस गई।
मैंने कहा- यहाँ कुछ नहीं करते !
तो वो बोली- कोई फर्क नहीं पड़ता, मम्मी तो अब सो गई, वो सुबह ही उठेगी।
यह कह कर मेरा हाथ अपने मम्मों पर सहलाने लगी। असल वो मेरे सहलाने से गर्म हो चुकी थी और अब बस चुदना चाहती थी।
तो मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया, उसकी गांड के नीचे एक तकिया रखा और सीधा उसकी चूत में अपना लंड डाल दिया और सोचा कि कुछ धक्कों के बाद यह मान जाएगी मगर मुझे क्या मालूम था कि उसने अपनी चूत में गाजर और मूली दे-दे कर अपनी चूत को चुदक्कड़ बना दिया था।
मैं उसे धक्के मारता रहा और वो मज़े लेती रही, हर दस मिनट के ब्रेक के बाद फिर चालू हो जाती।
फिर थोड़ी देर बाद मैंने सोचा- यह ऐसे नहीं मानेगी, मैंने उसे उसकी गांड मारने के लिए राज़ी कर लिया।वो नादान मान गई और बोली- ठीक है ! यह भी करके देख लेते हैं !
मैंने कहा- ठीक है, मगर ज्यादा शोर मत मचाना, तुम्हारी मम्मी जाग जाएगी।
वो बोली- ठीक है !
मैंने पहले उसकी गांड में अपनी दो उँगलियाँ डाल के देखा कि उसका छेद बहुत ढीला था। मैंने उसे उसका छेद टाईट करने के लिए कहा और अपना लंड उसकी गांड के अन्दर डालना चालू किया आहिस्ता-2 !
वो सिसकियाँ भरने लगी और और शायद उसे दर्द भी हो रहा था। फिर मैंने अपना लंड बाहर निकाला और एक ही झटके में अन्दर तक डाल दिया वो बड़ी तेज़ी से चीखी और मैंने उसका मुंह अपने हाथों से बंद कर दिया। मैंने कई धक्के मारे उसकी गांड में, जिससे उसे बहुत दर्द हुआ पर मैंने सोचा कि उसे सबक तो सिखाना ही पड़ेगा।
थोड़ी देर बाद मैंने अपना लंड उसकी गांड से निकला और उसे बिस्तर पर सीधा लिटा दिया और उसकी एक टांग उठा के अपने कंधे पे रखी और उसकी चूत में अपना लंड बाड़ दिया और बहुत देर तक उसको मैंने चोद। उस बंदी ने भी हार नहीं मानी और हद से ज्यादा दर्द के बाद भी वो मेरा साथ देती रही। शायद इसी को हवस कहते हैं।
मैंने फिर उसे घोड़ी बनाया और फ़िर उसकी चूत में अपना लंड बाड़ दिया। अब वो निढाल हो चुकी थी और शायद इससे ज्यादा झेल नहीं पाती, तो मैंने उसे छोड़ दिया और उसके बगल में लेट कर उसके चुम्बन लेने लगा। अब मैं भी थक रहा था और सोना चाहता था और हम दोनों सोने चले गए।
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दो बहनों की चुदाई
दो बहनों की चुदाई
प्रेषक : चोदू चोदू
मेरा नाम बबलू है और मैं आगरा का रहने वाला हूँ। मेरे घर में तीन ही लोग हैं, मैं, पिताजी और माँ।
बात उस समय की है जब मैं पढ़ता था। मेरे पड़ोस में शर्मा जी का घर था, उनकी दो बेटियाँ थी, एक तो मेरे साथ ही पढ़ती थी। मैं पढ़ने में काफी होशियार था इसलिए कई बच्चे मुझसे सवाल पूछा करते थे और मैं भी सबकी मदद कर देता था। मैं अपने मोहल्ले का काफी सीधा लड़का था।
अब मैं आप लोगो को शर्मा जी की बेटियों के बारे में बताता हूँ। बड़ी का नाम सीमा और छोटी का अंशु था। दोनों की जवानी उभार पर थी पर छोटी वाली तो कुछ ज्यादा आगे थी। सीमा का फिगर बड़ा मस्त था 24-36-24, पर रंग थोड़ा सांवला था। अंशु तो गजब की बाला थी, गोरा रंग और गजब का फिगर ! ऐसा कि देखते ही चोदने का मन करे और कई लड़के तो खड़े-2 मुठ मार दें ! फिर भी मैं इन सब पर ध्यान नहीं देता था।
एक दिन की बात है, मैं शाम को घर के बाहर टहलने निकला, तभी अंशु दौड़ती हुई मेरे पास आई और कहा- दीदी आपको बुला रही है, उन्हें कुछ पूछना है।
मैं चलने को तैयार हो गया और उसके पीछे पीछे उसके घर चला गया। वहाँ देखा तो सीमा कुछ पढ़ रही थी। उसके मम्मी-डैडी कहीं बाहर गए हुए थे और घर पर बस वही दोनों थी।
अंशु ने मुझे एक सोफे पर बैठाया और पानी लेने चली गई। तब तक सीमा अपनी किताब लेकर मेरे पास आ गई। उसने आसमानी रंग की एकदम पतली नाइटी पहन रखी थी जिसमें से उसकी काली रंग की ब्रा-पैंटी साफ़ झलक रही थी।
पहले तो मैं थोड़ा शरमाया पर सब सही हो गया। वो मेरे सामने वाली कुर्सी पर बैठ गई और सवाल पूछने लगी। सवाल पूछते-2 वो कुछ ऐसा कर रही थी कि उसके स्तन मुझे दिख जाएँ। मेरी नजरें उसके वक्ष पर अटक गई। वह अपनी सफलता पर थोड़ा मुस्कुराई और फिर आगे पूछने लगी।
तब तक अंशु पानी लेकर आ गई। वह आगे बढ़ी और एक कुर्सी से टकरा गई और पानी मेरी पैंट पर गिर गया। मैं घबरा गया। सीमा के स्तन देखते हुए मेरा लंड एकदम कड़क हो गया था।
अंशु ने मुझसे माफ़ी मांगी और एक तौलिया दे दिया। मैं बाथरूम में चला गया। तभी सीमा वहाँ आ गई और मेरा हाथ पकड़ लिया।
मैं काफी डर गया और अपना हाथ खींच लिया।
वो अंशु को बुलाते हुए बोली- देख रे कैसा शरमा रहा है, जैसे कभी लड़की ही नहीं देखी।
अंशु भी आ गई और वो दोनों मुझे बेडरूम में ले गई।
मैं सिर्फ अंडरवियर और शर्ट में था।
मुझे देख कर सीमा बोली- हाय रे ! कातिल कहाँ छुपा था अब तक?
अब उन दोनों ने मुझ पर सेक्सी कमेंट्स करने शुरु कर दिए।
मैं बेचैन हो गया और उनसे कहा- मुझे जाने दो !
पर वो भला कहाँ मानने वाली थी।
अंशु ने पीछे से मुझे पकड़ लिया और मेरे शर्ट के बटन खोल दिए। सीमा भी आगे से मेरे ऊपर चढ़ गई और अपने स्तनों को मेरे सीने पर दबाने लगी और मुझे बेतहाशा चूमने लगी।
मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था। तब उसने मेरे अंडरवियर में हाथ डाला और मेरे लिंग को दबाने लगी।
तभी अंशु ने पीछे से एक ब्लू फिल्म चला दी और कहा- तुम तो काफी ठंडे लगते हो, क्या पहले तुमने ये सब नहीं किया?
मैंने ना में जवाब दिया।
ब्लू फिल्म देख कर मुझे भी जोश आने लगा और मेरा लिंग तनकर 8 इंच का हो गया।
मैंने सीमा की नाइटी उतार दी और ब्रा के बाहर से ही उसके उरोजों को दबाने लगा। क्या सॉलिड बूब्स थे उसके ! मन तो कर रहा था कि काटकर खा लो।
मैंने उसकी पैंटी में ऊँगली डाली और उसकी योनि में ऊँगली करने लगा। उसकी चूत में से पानी आने लगा।
मैंने उसकी ब्रा का हुक खोल दिया और पैंटी भी उतार दी, उसने भी मेरा अंडरवियर उतार दिया। अब दोनों एकदूसरे के सामने नंगे खड़े थे। मैंने पहली बार चूत के दर्शन किए थे। उसकी गुलाबी रंग की चूत पर एक भी बाल नहीं था। उसके बड़े-2 चूतड़ उसको और हसीं बना रहे थे।
मेरे लिंग को देखते ही वो बोली-कितने गंदे हो तुम ! कभी अपनी झांटें भी साफ़ कर लिया करो !
मैंने कहा- डर लगता है ! कहीं कट गया तो?
उसने अपनी बहन अंशु से ब्लेड मंगाया और कहा- आओ, मैं तुम्हारी झांटें बना देती हूँ।
वो मुझे बाथरूम में ले गई और झांटे साफ़ करने लगी और इस बीच मैं उसके स्तन दबाता रहा।
इसके बाद उसने शॉवर चला दिया और हम दोनों उसके नीचे भीगने लगे। एक तरफ पानी और दूसरी तरफ आग, पर आज पानी भी आग को नहीं बुझा पाया।
उसने मेरा लिंग मुँह में ले लिया और चूसने लगी। मैं भी उसकी चूचियों को चूसता रहा और चूत में ऊँगली करता रहा।
उसका बदन जलने लगा और कहने लगी- अब और न तड़पाओ मुझे। चोद दो इस चूत को। फाड़ दो इसे अपने फौलादी लंड से।
मुझसे भी अब रहा नहीं जा रहा था। मैंने उसकी कमर पर हाथ लगाया और उसकी चूत पर निशाना लगाते हुए अपना लंड आगे दिया। पर मेरा लंड किनारे हो गया। उसकी योनि काफी कसी थी। उसकी गुलाबी चूत शायद अभी तक कुंवारी थी। मैंने २-३ बार कोशिश की पर सफल नहीं हुआ।
फिर उसने मेरे लंड पर शैंपू लगाया और अपनी योनि पर भी। अब धीरे से उसने मेरे लंड को योनि के मुख पर टिकाया और मुझसे धक्का लगाने को कहा, वो खुद भी धक्का लगाने लगी। शैंपू की चिकनाहट के कारण लिंग योनि में सरकता चला गया।
आधा अन्दर जाते ही वो जोर से चिल्लाईई और बाहर निकालने के लिए कहने लगी।
मैंने अपने होंठ उसके होठों पर रख दिए और उसके स्तन दबाने लगा। धीरे-2 उसका दर्द कम हुआ, तभी मैंने लिंग को थोड़ा बाहर खींच कर पूरी ताकत से पेल दिया। वो तड़प उठी।
मैं फिर उसके होठों को चूमने लगा। धीरे-2 वो जोश में आने लगी और अपने चूतड़ उछाल-2 कर मजे लेने लगी। मैंने भी अपनी स्पीड बढ़ा दी।
करीब दस मिनट बाद वो झड़ गई और उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया पर मैं अभी भी लगा रहा।
पाँच मिनट बाद मैंने भी वीर्य की पिचकारी उसकी चूत में छोड़ दी और उसके ऊपर लेट गया।
तभी उसकी बहन अंशु वहाँ आ गई और कहने लगी- अब मेरी प्यास भी मिटा दो।
मैंने देखा सीमा वहीं शॉवर के नीचे पड़ी है और उसकी चूत से पानी और खून निकल रहा है।
मैंने सीमा को वहीं छोड़ा और अंशु के पास पहुँच गया।
जैसा मैंने पहले ही बताया था कि अंशु सीमा से भी ज्यादा सेक्सी माल थी और ऊपर से उसका गोरा रंग और गजब ढा रहा था।
मुझे ऐसा लगा की कोई परी मेरे सामने खडी है और कह रही है- आओ, मुझे चोद दो, मेरी चूत की प्यास बुझा दो।
मैंने उसे उठाया और बेड पर लिटा दिया और खुद उसके ऊपर लेट गया। उसने कसकर मुझे पकड़ लिया और उसकी चूचियों का नरम-2 एहसास मुझे अपने सीने पर होने लगा।
मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और चूसने लगा, धीरे से मैंने उसके होंठों को थोड़ा काट लिया। उसके पूरे बदन में आग लग गई, उसने भी मुझे चूमना शुरु कर दिया।
फिर मैंने उसे थोड़ा अलग किया और उसके स्तन दबाने लगा। वो भी मेरा लिंग दबाने लगी और लिंग को चूसना शुरु कर दिया। मेरा लंड फिर खड़ा हो गया। मैं भी उसकी चूत में ऊँगली डालने लगा और उसके स्तनों को चूसने लगा।
अंशु की योनि तो सीमा से भी मस्त और कसी थी। उसको देख कर ऐसा लगता था मानो भगवान् ने फुर्सत में उसे बनाया है।
तभी उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया और मैंने भी अपना वीर्य उसके मुँह में भर दिया, उसने पूरा वीर्य पी लिया और लिंग को चाट-2 कर साफ़ करने लगी।
मेरा लिंग एक बार फिर मैदान में आ गया और इस बार उसका निशाना सिर्फ अंशु की चूत थी। अंशु भी गरम हो गई थी और बार-2 मुझे छोड़ने का निमंत्रण दे रही थी।
मैंने उसकी गांड के नीचे तकिया लगाया और उसकी टांगों को अपने कंधे पर रख लिया। मुझे पता था कि अंशु की चूत भी अभी कुंवारी है इसलिए मैंने धीरे से उसकी योनि का मुँह फैलाया और उस पर लंड का सुपारा टिका दिया।
मैं उसके होंठों को चूमता रहा और एक उसके पुष्ट उरोजों को दबाते हुए हल्का सा झटका दिया और मेरा लंड आधा अंशु की चूत में पंहुच गया।
वो दर्द से चीख पड़ी पर मैंने उसे ज्यादा मौका नहीं दिया और उसके होंठों को चूसता रहा। उसकी झिल्ली फट चुकी थी, मैंने उसका कौमार्य भंग कर दिया था।
मैंने थोड़ा पीछे होते हुए पूरी ताकत से लंड उसकी चूत में डाल दिया।
वो तड़प उठी पर थोड़ी ही देर में उसे मजा आने लगा और वो चूतड़ उछाल-2 कर साथ देने लगी।
करीब 15 मिनट बाद वो झड़ गई। मैंने अपना लंड बाहर निकाला और उसे कुतिया की पोजिशन में कर दिया और फिर उसी तरह करीब आधे घंटे चलता रहा।
तभी उसने कहा- बबलू, अब मैं झड़ने वाली हूँ।
मैं भी झड़ने वाला था, मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी और हम दोनों एक साथ स्खलित हो गए। वो मुझसे चिपक गई और निढाल हो गई।
उस रात हम तीनों ने चुदाई के कई राउंड चलाये। जिसमें दो बार मैंने उन दोनों की गांड मारी और चूत को फाड़ कर भोंसड़ा कर दिया।
उसके बाद भी हमे जब भी मौका मिलता हम पूरा फायदा उठाते।
अंशु की चूत तो अब भी वैसी ही टाइट लगती है। कई बार मैंने उनकी सहेलियों के साथ भी सम्बंध बनाए।
पर यह अगली बार।
यह कहानी आप लोगों को कैसी लगी, जरूर बतायें, मुझे ईमेल करें !
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प्रेषक : चोदू चोदू
मेरा नाम बबलू है और मैं आगरा का रहने वाला हूँ। मेरे घर में तीन ही लोग हैं, मैं, पिताजी और माँ।
बात उस समय की है जब मैं पढ़ता था। मेरे पड़ोस में शर्मा जी का घर था, उनकी दो बेटियाँ थी, एक तो मेरे साथ ही पढ़ती थी। मैं पढ़ने में काफी होशियार था इसलिए कई बच्चे मुझसे सवाल पूछा करते थे और मैं भी सबकी मदद कर देता था। मैं अपने मोहल्ले का काफी सीधा लड़का था।
अब मैं आप लोगो को शर्मा जी की बेटियों के बारे में बताता हूँ। बड़ी का नाम सीमा और छोटी का अंशु था। दोनों की जवानी उभार पर थी पर छोटी वाली तो कुछ ज्यादा आगे थी। सीमा का फिगर बड़ा मस्त था 24-36-24, पर रंग थोड़ा सांवला था। अंशु तो गजब की बाला थी, गोरा रंग और गजब का फिगर ! ऐसा कि देखते ही चोदने का मन करे और कई लड़के तो खड़े-2 मुठ मार दें ! फिर भी मैं इन सब पर ध्यान नहीं देता था।
एक दिन की बात है, मैं शाम को घर के बाहर टहलने निकला, तभी अंशु दौड़ती हुई मेरे पास आई और कहा- दीदी आपको बुला रही है, उन्हें कुछ पूछना है।
मैं चलने को तैयार हो गया और उसके पीछे पीछे उसके घर चला गया। वहाँ देखा तो सीमा कुछ पढ़ रही थी। उसके मम्मी-डैडी कहीं बाहर गए हुए थे और घर पर बस वही दोनों थी।
अंशु ने मुझे एक सोफे पर बैठाया और पानी लेने चली गई। तब तक सीमा अपनी किताब लेकर मेरे पास आ गई। उसने आसमानी रंग की एकदम पतली नाइटी पहन रखी थी जिसमें से उसकी काली रंग की ब्रा-पैंटी साफ़ झलक रही थी।
पहले तो मैं थोड़ा शरमाया पर सब सही हो गया। वो मेरे सामने वाली कुर्सी पर बैठ गई और सवाल पूछने लगी। सवाल पूछते-2 वो कुछ ऐसा कर रही थी कि उसके स्तन मुझे दिख जाएँ। मेरी नजरें उसके वक्ष पर अटक गई। वह अपनी सफलता पर थोड़ा मुस्कुराई और फिर आगे पूछने लगी।
तब तक अंशु पानी लेकर आ गई। वह आगे बढ़ी और एक कुर्सी से टकरा गई और पानी मेरी पैंट पर गिर गया। मैं घबरा गया। सीमा के स्तन देखते हुए मेरा लंड एकदम कड़क हो गया था।
अंशु ने मुझसे माफ़ी मांगी और एक तौलिया दे दिया। मैं बाथरूम में चला गया। तभी सीमा वहाँ आ गई और मेरा हाथ पकड़ लिया।
मैं काफी डर गया और अपना हाथ खींच लिया।
वो अंशु को बुलाते हुए बोली- देख रे कैसा शरमा रहा है, जैसे कभी लड़की ही नहीं देखी।
अंशु भी आ गई और वो दोनों मुझे बेडरूम में ले गई।
मैं सिर्फ अंडरवियर और शर्ट में था।
मुझे देख कर सीमा बोली- हाय रे ! कातिल कहाँ छुपा था अब तक?
अब उन दोनों ने मुझ पर सेक्सी कमेंट्स करने शुरु कर दिए।
मैं बेचैन हो गया और उनसे कहा- मुझे जाने दो !
पर वो भला कहाँ मानने वाली थी।
अंशु ने पीछे से मुझे पकड़ लिया और मेरे शर्ट के बटन खोल दिए। सीमा भी आगे से मेरे ऊपर चढ़ गई और अपने स्तनों को मेरे सीने पर दबाने लगी और मुझे बेतहाशा चूमने लगी।
मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था। तब उसने मेरे अंडरवियर में हाथ डाला और मेरे लिंग को दबाने लगी।
तभी अंशु ने पीछे से एक ब्लू फिल्म चला दी और कहा- तुम तो काफी ठंडे लगते हो, क्या पहले तुमने ये सब नहीं किया?
मैंने ना में जवाब दिया।
ब्लू फिल्म देख कर मुझे भी जोश आने लगा और मेरा लिंग तनकर 8 इंच का हो गया।
मैंने सीमा की नाइटी उतार दी और ब्रा के बाहर से ही उसके उरोजों को दबाने लगा। क्या सॉलिड बूब्स थे उसके ! मन तो कर रहा था कि काटकर खा लो।
मैंने उसकी पैंटी में ऊँगली डाली और उसकी योनि में ऊँगली करने लगा। उसकी चूत में से पानी आने लगा।
मैंने उसकी ब्रा का हुक खोल दिया और पैंटी भी उतार दी, उसने भी मेरा अंडरवियर उतार दिया। अब दोनों एकदूसरे के सामने नंगे खड़े थे। मैंने पहली बार चूत के दर्शन किए थे। उसकी गुलाबी रंग की चूत पर एक भी बाल नहीं था। उसके बड़े-2 चूतड़ उसको और हसीं बना रहे थे।
मेरे लिंग को देखते ही वो बोली-कितने गंदे हो तुम ! कभी अपनी झांटें भी साफ़ कर लिया करो !
मैंने कहा- डर लगता है ! कहीं कट गया तो?
उसने अपनी बहन अंशु से ब्लेड मंगाया और कहा- आओ, मैं तुम्हारी झांटें बना देती हूँ।
वो मुझे बाथरूम में ले गई और झांटे साफ़ करने लगी और इस बीच मैं उसके स्तन दबाता रहा।
इसके बाद उसने शॉवर चला दिया और हम दोनों उसके नीचे भीगने लगे। एक तरफ पानी और दूसरी तरफ आग, पर आज पानी भी आग को नहीं बुझा पाया।
उसने मेरा लिंग मुँह में ले लिया और चूसने लगी। मैं भी उसकी चूचियों को चूसता रहा और चूत में ऊँगली करता रहा।
उसका बदन जलने लगा और कहने लगी- अब और न तड़पाओ मुझे। चोद दो इस चूत को। फाड़ दो इसे अपने फौलादी लंड से।
मुझसे भी अब रहा नहीं जा रहा था। मैंने उसकी कमर पर हाथ लगाया और उसकी चूत पर निशाना लगाते हुए अपना लंड आगे दिया। पर मेरा लंड किनारे हो गया। उसकी योनि काफी कसी थी। उसकी गुलाबी चूत शायद अभी तक कुंवारी थी। मैंने २-३ बार कोशिश की पर सफल नहीं हुआ।
फिर उसने मेरे लंड पर शैंपू लगाया और अपनी योनि पर भी। अब धीरे से उसने मेरे लंड को योनि के मुख पर टिकाया और मुझसे धक्का लगाने को कहा, वो खुद भी धक्का लगाने लगी। शैंपू की चिकनाहट के कारण लिंग योनि में सरकता चला गया।
आधा अन्दर जाते ही वो जोर से चिल्लाईई और बाहर निकालने के लिए कहने लगी।
मैंने अपने होंठ उसके होठों पर रख दिए और उसके स्तन दबाने लगा। धीरे-2 उसका दर्द कम हुआ, तभी मैंने लिंग को थोड़ा बाहर खींच कर पूरी ताकत से पेल दिया। वो तड़प उठी।
मैं फिर उसके होठों को चूमने लगा। धीरे-2 वो जोश में आने लगी और अपने चूतड़ उछाल-2 कर मजे लेने लगी। मैंने भी अपनी स्पीड बढ़ा दी।
करीब दस मिनट बाद वो झड़ गई और उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया पर मैं अभी भी लगा रहा।
पाँच मिनट बाद मैंने भी वीर्य की पिचकारी उसकी चूत में छोड़ दी और उसके ऊपर लेट गया।
तभी उसकी बहन अंशु वहाँ आ गई और कहने लगी- अब मेरी प्यास भी मिटा दो।
मैंने देखा सीमा वहीं शॉवर के नीचे पड़ी है और उसकी चूत से पानी और खून निकल रहा है।
मैंने सीमा को वहीं छोड़ा और अंशु के पास पहुँच गया।
जैसा मैंने पहले ही बताया था कि अंशु सीमा से भी ज्यादा सेक्सी माल थी और ऊपर से उसका गोरा रंग और गजब ढा रहा था।
मुझे ऐसा लगा की कोई परी मेरे सामने खडी है और कह रही है- आओ, मुझे चोद दो, मेरी चूत की प्यास बुझा दो।
मैंने उसे उठाया और बेड पर लिटा दिया और खुद उसके ऊपर लेट गया। उसने कसकर मुझे पकड़ लिया और उसकी चूचियों का नरम-2 एहसास मुझे अपने सीने पर होने लगा।
मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और चूसने लगा, धीरे से मैंने उसके होंठों को थोड़ा काट लिया। उसके पूरे बदन में आग लग गई, उसने भी मुझे चूमना शुरु कर दिया।
फिर मैंने उसे थोड़ा अलग किया और उसके स्तन दबाने लगा। वो भी मेरा लिंग दबाने लगी और लिंग को चूसना शुरु कर दिया। मेरा लंड फिर खड़ा हो गया। मैं भी उसकी चूत में ऊँगली डालने लगा और उसके स्तनों को चूसने लगा।
अंशु की योनि तो सीमा से भी मस्त और कसी थी। उसको देख कर ऐसा लगता था मानो भगवान् ने फुर्सत में उसे बनाया है।
तभी उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया और मैंने भी अपना वीर्य उसके मुँह में भर दिया, उसने पूरा वीर्य पी लिया और लिंग को चाट-2 कर साफ़ करने लगी।
मेरा लिंग एक बार फिर मैदान में आ गया और इस बार उसका निशाना सिर्फ अंशु की चूत थी। अंशु भी गरम हो गई थी और बार-2 मुझे छोड़ने का निमंत्रण दे रही थी।
मैंने उसकी गांड के नीचे तकिया लगाया और उसकी टांगों को अपने कंधे पर रख लिया। मुझे पता था कि अंशु की चूत भी अभी कुंवारी है इसलिए मैंने धीरे से उसकी योनि का मुँह फैलाया और उस पर लंड का सुपारा टिका दिया।
मैं उसके होंठों को चूमता रहा और एक उसके पुष्ट उरोजों को दबाते हुए हल्का सा झटका दिया और मेरा लंड आधा अंशु की चूत में पंहुच गया।
वो दर्द से चीख पड़ी पर मैंने उसे ज्यादा मौका नहीं दिया और उसके होंठों को चूसता रहा। उसकी झिल्ली फट चुकी थी, मैंने उसका कौमार्य भंग कर दिया था।
मैंने थोड़ा पीछे होते हुए पूरी ताकत से लंड उसकी चूत में डाल दिया।
वो तड़प उठी पर थोड़ी ही देर में उसे मजा आने लगा और वो चूतड़ उछाल-2 कर साथ देने लगी।
करीब 15 मिनट बाद वो झड़ गई। मैंने अपना लंड बाहर निकाला और उसे कुतिया की पोजिशन में कर दिया और फिर उसी तरह करीब आधे घंटे चलता रहा।
तभी उसने कहा- बबलू, अब मैं झड़ने वाली हूँ।
मैं भी झड़ने वाला था, मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी और हम दोनों एक साथ स्खलित हो गए। वो मुझसे चिपक गई और निढाल हो गई।
उस रात हम तीनों ने चुदाई के कई राउंड चलाये। जिसमें दो बार मैंने उन दोनों की गांड मारी और चूत को फाड़ कर भोंसड़ा कर दिया।
उसके बाद भी हमे जब भी मौका मिलता हम पूरा फायदा उठाते।
अंशु की चूत तो अब भी वैसी ही टाइट लगती है। कई बार मैंने उनकी सहेलियों के साथ भी सम्बंध बनाए।
पर यह अगली बार।
यह कहानी आप लोगों को कैसी लगी, जरूर बतायें, मुझे ईमेल करें !
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