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प्यारी पूजा
प्रेषक :राजा गर्ग

दोस्तों आज जो किस्सा आपको सुनाने जा रहा हूँ वो उस रात का है जब मैं समझ नहीं पाया कि वो सब हो कैसे गया। आज जब मैं उस रात के बारे में सोचता हूँ तो उलझन में पड़ जाता हूँ। दरअसल बात तब की है जब मैंने कॉलेज में दाखिला लिया था। तभी मेरी ममेरी बहन की शादी पड़ गई।

हम सब शादी में गए हुए थे और सगाई वाले दिन जब हम लड़के वालों के आने का इंतज़ार कर रहे थे। तभी उनकी गाड़ियाँ दरवाज़े पर आ कर रुकी और हम जीजाजी के साथ अन्दर जाने लगे। तभी पीछे मेरी मामी ने आवाज़ लगाई- राजन, पूजा अकेले सामान ला रही है, उसके साथ सामान उठा लाओ !

मैं गया और उसको देखा। शकल से एक औसत लड़की जिसकी फिगर कमाल की, साथ ही मम्मे भी इतने बड़े और उसके ब्लाऊज़ से झांकती वो जवानी, उसके वो गुलाबी होंठ ! मैं तो बस उसे देखता ही रह गया। वो मेरे जीजाजी की बहन थी।

खैर मैं उसके साथ अन्दर तक गया और मैंने देखा कि वो भी मुझे नोटिस कर रही थी। हमारी कई बार आखें मिली और एक खिंचाव सा पैदा हो गया हम दोनों के बीच में। हमने साथ में खूब खुशियाँ मनाई और खूब नाचे गाये।

जाते वक़्त मैंने हिम्मत करके पूजा का नंबर मांग लिया और उससे बातें करने लगा। शादी एक महीने बाद थी। तब तक मैंने पूजा को सेट कर लिया था। अब वो शायद मुझे पसंद करने लगी थी।

फिर शादी के दिन वो उस गुलाबी साड़ी में क्या लग रही थी, शादी में शायद ही कोई ऐसा मर्द हो जिसने उसे मुड़-2 कर न देखा हो।

फिर जब डांस करने की बारी आई तो मैंने पूजा के साथ बहुत देर तक डांस किया। डांस करते वक़्त कई बार मेरे हाथ उसके मम्मों पर छुए और वो सब समझ कर मुस्कुराने लगी लेकिन उस वक़्त तक मेरे मन में कोई खास पाप नहीं जागा था अगर वो खाना खाते वक़्त मुझे आँख मार के अलग आने के लिए नहीं कहती। उसने मुझे अलग बुलाया और बोली- मेरा यहाँ मन नहीं लग रहा है, कुछ देर बाहर घूम कर आएँ?

मैंने कहा- चलो !

मगर मैं एकदम से नहीं निकल सकता था इसलिए मौका पाकर मैंने अपनी गाड़ी में पहुँच कर उसे फ़ोन मिला दिया।

वो आ गई और हम गाड़ी में बैठ कर निकल लिए। सर्दी की रात थी और बर्फीली ठण्ड पड़ रही थी और उस बंदी(लड़की) को घूमना था। मेरी समझ में उसके सारे सिग्नल आ तो रहे थे मगर मन में यह डर था कि हम लड़की वाले थे, कोई ऊँच-नीच हो गई तो बदनामी हो जाएगी।

फिर हम मुख्य सड़क पर निकल आये और पूजा मेरे से बोली- इतनी देर तुम अन्दर बोर नहीं हो रहे थे क्या?

मैंने कहा- हाँ, हो तो रहा था मगर क्या कर सकते हैं, लड़की वाले हैं, लड़के वाले होते तो भाई की सालियों को ही छेड़ लेते !

वो बोली- तो मेरे साथ अन्दर इतनी देर से क्या कर रहे थे? कभी यहाँ हाथ, कभी वहाँ ?

मैं झेंप गया और वो बोली- मैं सब समझती हूँ !

मैंने गाड़ी अँधेरे एक साइड में लगा कर उससे कहा- समझती हो तो क्या ख्याल है?

वो बोली- मैं इतनी रात को तुम्हारे साथ सिर्फ घूमने थोड़े ही आई हूँ !

मैंने उसकी तरफ ध्यान से देखा और अचानक ही हम एक दूसरे की तरफ खिंचते चले गए और हमारे होंठ एक दूसरे से मिल गए। मैं उसके होंठों का रस पीने को बेताब था जैसे कि मेरी तमन्ना पूरी होने को थी।

बहुत देर तक उसके होंठ चूसने के बाद मैंने उसके ब्लाऊज़ के ऊपर से उसके मम्मों को सहलाना चालू किया। वो भी थोड़ी ना नुकुर के बाद मेरा साथ देने लगी। फिर मैंने अपने मुँह को उसकी छाती से लगाया और उसके जिस्म की प्यारी सी खुशबू लेने लगा। साथ ही उसकी भी सिसकियाँ चालू हो गई। मैं इस बात का पूरा ख्याल भी रख रहा था कि किसी पल पूजा को ऐसा न लगे कि मैं उसके साथ ज़बरदस्ती कर रहा हूँ।

फिर मैंने उसके ब्लाऊज़ के अन्दर हाथ डाला और ऐसा लगा जैसे किसी भट्टी के अन्दर हाथ दे दिया हो। उसका पूरा जिस्म जल रहा था। मैंने बिना मौका गंवाए बिना उसका ब्लाऊज़ ऊपर कर दिया और उसके मम्मो को सहला के उसके चुम्बन लेने लगा। कुछ देर बाद जब वो पूरी तरह मदहोश हो गई तब मैंने उसकी साड़ी ऊपर करनी चालू की। गाडी में जगह कम होने के कारण हमें थोड़ी परेशानी हो रही थी।

फिर मैंने उसकी चूत में हाथ डाला और पाया कि उसकी चूत बहुत पानी छोड़ चुकी थी और एकदम मुलायम और गरम थी। फिर उसने अपने हाथों से मेरी पेंट की जिप खोली और मेरा लंड को सहलाने लगी जोकि अब तक मूसल बन गया था। उसने मेरे लिंग की चुसाई करनी चालू की और मैं उसके बाकी कपड़े उतारने लगा। साथ ही मैंने उसके उन नरम चूचों का भी भरपूर आनंद लिया। हर तरह से मरोड़ के, चूस के दांतों से चबा के मैंने उन पर अपनी छाप छोड़ दी।

अब मैं जानता था कि देर करना सही नहीं है। पहले एक बार अपनी छाप लड़की के अन्दर छोड़ दो, फिर बाकी काम तो बाद में होते रहेंगे।

मैंने उसकी सीट पीछे को लिटा दी और उसकी पैंटी को साइड कर के अपने लंड से उसका छेद सहलाने लगा।

और वो आहें भरते हुए बोली- फक्क मी नाओ !

और मैंने आहिस्ता से उसकी चूत में अपना लंड घुसा दिया। और वो एक प्यारी सी चीख के साथ पीछे हो गई।

मैंने अपना लंड बाहर निकल कर पूरी जान के साथ अन्दर तक डाल दिया मगर इस बार मुझे भी दर्द हुआ क्योंकि शायद उसकी झिल्ली फट गई थी इस बार और वो दर्द से छटपटा उठी।

मैंने फ़ौरन उसके होठों पर अपने होंठ रख दिए और उसे अपने से लिपटा लिया और उसके तुरंत बाद मैंने कुछ कागज़ सीट के ऊपर रख दिए ताकि अगर खून गिरे भी तो सीट गन्दी न हो।

फिर मैंने उससे पूछा- आगे बढ़ें?

उसने प्यार से मेरी तरफ देखा और बोली- थोड़ी देर और, बहुत मज़ा आ रहा है।

मेरे लिए तो अच्छी बात थी और मैंने उसकी चूत में दुबारा अपना लंड दिया और 5-6 धक्कों के बाद बोली- अब बस !

मेरा मन तो नहीं था, मुझे मानना पड़ा, रिश्तेदारी का सवाल था। और उसकी चूत में से अपना लंड निकाल कर साफ़ करने लगा।

वो बोली- अब मेरी चूत को थोड़ी देर चूसो !

मैंने उसकी चूत फिर एक कागज़ से साफ़ की और उसे चूसना चालू किया। फिर थोड़ी देर बाद मेरा ध्यान टाइम पर गया और मैंने उससे कहा- अब वापस चलना चाहिए !

वो बोली- ठीक है !

मैंने उसे गाड़ी से बाहर एक चक्कर मारने की सलाह दी ताकि उसकी चाल में कुछ सुधार आ जाये जोकि पहली बार चुदने के बाद बिगड़ जाती है।

वापस आकर हम दोनों चुपचाप जश्न में शामिल हो गए।

उसके बाद पूजा से मेरी लगभग रोज़ बातें होती थी और मेरे साथ फ़ोन पर सब तरह की बातें करती थी। वो हंस-2 कर बताती थी कि मैंने कल रात तुम्हारे नाम से मुठ्ठी मारी और बोलती कि उस दिन का काम पूरा करने कब आओगे।

फिर कुछ दिन बाद मैं अपने जीजाजी के घर किसी काम से गया और मुझे रात को वहीं रुकना था। घर पर सिर्फ जीजाजी, दीदी, पूजा और उसकी मम्मी थी।

अचानक ही रात को जीजाजी को फ़ोन आया कि उनके दोस्त की मम्मी गुज़र गई है तो उन्हें जाना पड़ा। मेरी दीदी भी साथ चली गई। दीदी की सास तो नौ बजते ही सो जाती थी। मुझे मौका मिल गया। हमने कंप्यूटर में फिल्म चलाई और देखने लगे। सर्दी थी और वो एक बड़ा सा कम्बल लाकर मेरे बगल में ही बैठ गई। पिक्चर का नाम "जूली" था, जिसमें नेहा धूपिया ने क्या दृश्य दिए थे। पूजा मेरी बगल में बैठी थी और जब पहला चुम्बन दृश्य आया तो मुझे शादी की वो रात ध्यान आ गई।

फिर अचानक मेरे घर से फ़ोन और मैं बाहर गया और वापस आकर कम्बल में घुस गया तो मैंने पाया कि पूजा ने अपनी जींस उतार रखी थी और वो सिर्फ पेंटी में रजाई के अन्दर थी। मैं अपना आपा खो रहा था और पूजा मुझे उकसाए जा रही थी। थोड़ी देर बाद एक दृश्य में डर लगने के बहाने पूजा मेरे से एकदम सट गई और मैं अपने आपको रोक नहीं पाया और उसकी टांगों को सहलाना चालू कर दिया। फिर मैंने अपना एक हाथ टॉप के अन्दर डाल दिया और दूसरे हाथ से उसकी चूत मसलता रहा। जब तक मूवी खत्म हुई, मैंने पूजा के जिस्म को मसल-मसल कर लाल कर दिया था और उसकी सारी लिपस्टिक खा चुका था।

जैसे ही पिक्चर ख़त्म हुई पूजा ने उठ कर कंप्यूटर बंद किया, दरवाज़ा बंद किया और आकर मेरी रजाई में फिर घुस गई।

मैंने कहा- यहाँ कुछ नहीं करते !

तो वो बोली- कोई फर्क नहीं पड़ता, मम्मी तो अब सो गई, वो सुबह ही उठेगी।

यह कह कर मेरा हाथ अपने मम्मों पर सहलाने लगी। असल वो मेरे सहलाने से गर्म हो चुकी थी और अब बस चुदना चाहती थी।

तो मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया, उसकी गांड के नीचे एक तकिया रखा और सीधा उसकी चूत में अपना लंड डाल दिया और सोचा कि कुछ धक्कों के बाद यह मान जाएगी मगर मुझे क्या मालूम था कि उसने अपनी चूत में गाजर और मूली दे-दे कर अपनी चूत को चुदक्कड़ बना दिया था।

मैं उसे धक्के मारता रहा और वो मज़े लेती रही, हर दस मिनट के ब्रेक के बाद फिर चालू हो जाती।

फिर थोड़ी देर बाद मैंने सोचा- यह ऐसे नहीं मानेगी, मैंने उसे उसकी गांड मारने के लिए राज़ी कर लिया।वो नादान मान गई और बोली- ठीक है ! यह भी करके देख लेते हैं !

मैंने कहा- ठीक है, मगर ज्यादा शोर मत मचाना, तुम्हारी मम्मी जाग जाएगी।

वो बोली- ठीक है !

मैंने पहले उसकी गांड में अपनी दो उँगलियाँ डाल के देखा कि उसका छेद बहुत ढीला था। मैंने उसे उसका छेद टाईट करने के लिए कहा और अपना लंड उसकी गांड के अन्दर डालना चालू किया आहिस्ता-2 !

वो सिसकियाँ भरने लगी और और शायद उसे दर्द भी हो रहा था। फिर मैंने अपना लंड बाहर निकाला और एक ही झटके में अन्दर तक डाल दिया वो बड़ी तेज़ी से चीखी और मैंने उसका मुंह अपने हाथों से बंद कर दिया। मैंने कई धक्के मारे उसकी गांड में, जिससे उसे बहुत दर्द हुआ पर मैंने सोचा कि उसे सबक तो सिखाना ही पड़ेगा।

थोड़ी देर बाद मैंने अपना लंड उसकी गांड से निकला और उसे बिस्तर पर सीधा लिटा दिया और उसकी एक टांग उठा के अपने कंधे पे रखी और उसकी चूत में अपना लंड बाड़ दिया और बहुत देर तक उसको मैंने चोद। उस बंदी ने भी हार नहीं मानी और हद से ज्यादा दर्द के बाद भी वो मेरा साथ देती रही। शायद इसी को हवस कहते हैं।

मैंने फिर उसे घोड़ी बनाया और फ़िर उसकी चूत में अपना लंड बाड़ दिया। अब वो निढाल हो चुकी थी और शायद इससे ज्यादा झेल नहीं पाती, तो मैंने उसे छोड़ दिया और उसके बगल में लेट कर उसके चुम्बन लेने लगा। अब मैं भी थक रहा था और सोना चाहता था और हम दोनों सोने चले गए।

coolrajaforever@gmail.com



दो बहनों की चुदाई
प्रेषक : चोदू चोदू

मेरा नाम बबलू है और मैं आगरा का रहने वाला हूँ। मेरे घर में तीन ही लोग हैं, मैं, पिताजी और माँ।

बात उस समय की है जब मैं पढ़ता था। मेरे पड़ोस में शर्मा जी का घर था, उनकी दो बेटियाँ थी, एक तो मेरे साथ ही पढ़ती थी। मैं पढ़ने में काफी होशियार था इसलिए कई बच्चे मुझसे सवाल पूछा करते थे और मैं भी सबकी मदद कर देता था। मैं अपने मोहल्ले का काफी सीधा लड़का था।

अब मैं आप लोगो को शर्मा जी की बेटियों के बारे में बताता हूँ। बड़ी का नाम सीमा और छोटी का अंशु था। दोनों की जवानी उभार पर थी पर छोटी वाली तो कुछ ज्यादा आगे थी। सीमा का फिगर बड़ा मस्त था 24-36-24, पर रंग थोड़ा सांवला था। अंशु तो गजब की बाला थी, गोरा रंग और गजब का फिगर ! ऐसा कि देखते ही चोदने का मन करे और कई लड़के तो खड़े-2 मुठ मार दें ! फिर भी मैं इन सब पर ध्यान नहीं देता था।

एक दिन की बात है, मैं शाम को घर के बाहर टहलने निकला, तभी अंशु दौड़ती हुई मेरे पास आई और कहा- दीदी आपको बुला रही है, उन्हें कुछ पूछना है।

मैं चलने को तैयार हो गया और उसके पीछे पीछे उसके घर चला गया। वहाँ देखा तो सीमा कुछ पढ़ रही थी। उसके मम्मी-डैडी कहीं बाहर गए हुए थे और घर पर बस वही दोनों थी।

अंशु ने मुझे एक सोफे पर बैठाया और पानी लेने चली गई। तब तक सीमा अपनी किताब लेकर मेरे पास आ गई। उसने आसमानी रंग की एकदम पतली नाइटी पहन रखी थी जिसमें से उसकी काली रंग की ब्रा-पैंटी साफ़ झलक रही थी।

पहले तो मैं थोड़ा शरमाया पर सब सही हो गया। वो मेरे सामने वाली कुर्सी पर बैठ गई और सवाल पूछने लगी। सवाल पूछते-2 वो कुछ ऐसा कर रही थी कि उसके स्तन मुझे दिख जाएँ। मेरी नजरें उसके वक्ष पर अटक गई। वह अपनी सफलता पर थोड़ा मुस्कुराई और फिर आगे पूछने लगी।

तब तक अंशु पानी लेकर आ गई। वह आगे बढ़ी और एक कुर्सी से टकरा गई और पानी मेरी पैंट पर गिर गया। मैं घबरा गया। सीमा के स्तन देखते हुए मेरा लंड एकदम कड़क हो गया था।

अंशु ने मुझसे माफ़ी मांगी और एक तौलिया दे दिया। मैं बाथरूम में चला गया। तभी सीमा वहाँ आ गई और मेरा हाथ पकड़ लिया।

मैं काफी डर गया और अपना हाथ खींच लिया।

वो अंशु को बुलाते हुए बोली- देख रे कैसा शरमा रहा है, जैसे कभी लड़की ही नहीं देखी।

अंशु भी आ गई और वो दोनों मुझे बेडरूम में ले गई।

मैं सिर्फ अंडरवियर और शर्ट में था।

मुझे देख कर सीमा बोली- हाय रे ! कातिल कहाँ छुपा था अब तक?

अब उन दोनों ने मुझ पर सेक्सी कमेंट्स करने शुरु कर दिए।

मैं बेचैन हो गया और उनसे कहा- मुझे जाने दो !

पर वो भला कहाँ मानने वाली थी।

अंशु ने पीछे से मुझे पकड़ लिया और मेरे शर्ट के बटन खोल दिए। सीमा भी आगे से मेरे ऊपर चढ़ गई और अपने स्तनों को मेरे सीने पर दबाने लगी और मुझे बेतहाशा चूमने लगी।

मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था। तब उसने मेरे अंडरवियर में हाथ डाला और मेरे लिंग को दबाने लगी।

तभी अंशु ने पीछे से एक ब्लू फिल्म चला दी और कहा- तुम तो काफी ठंडे लगते हो, क्या पहले तुमने ये सब नहीं किया?

मैंने ना में जवाब दिया।

ब्लू फिल्म देख कर मुझे भी जोश आने लगा और मेरा लिंग तनकर 8 इंच का हो गया।

मैंने सीमा की नाइटी उतार दी और ब्रा के बाहर से ही उसके उरोजों को दबाने लगा। क्या सॉलिड बूब्स थे उसके ! मन तो कर रहा था कि काटकर खा लो।

मैंने उसकी पैंटी में ऊँगली डाली और उसकी योनि में ऊँगली करने लगा। उसकी चूत में से पानी आने लगा।

मैंने उसकी ब्रा का हुक खोल दिया और पैंटी भी उतार दी, उसने भी मेरा अंडरवियर उतार दिया। अब दोनों एकदूसरे के सामने नंगे खड़े थे। मैंने पहली बार चूत के दर्शन किए थे। उसकी गुलाबी रंग की चूत पर एक भी बाल नहीं था। उसके बड़े-2 चूतड़ उसको और हसीं बना रहे थे।

मेरे लिंग को देखते ही वो बोली-कितने गंदे हो तुम ! कभी अपनी झांटें भी साफ़ कर लिया करो !

मैंने कहा- डर लगता है ! कहीं कट गया तो?

उसने अपनी बहन अंशु से ब्लेड मंगाया और कहा- आओ, मैं तुम्हारी झांटें बना देती हूँ।

वो मुझे बाथरूम में ले गई और झांटे साफ़ करने लगी और इस बीच मैं उसके स्तन दबाता रहा।

इसके बाद उसने शॉवर चला दिया और हम दोनों उसके नीचे भीगने लगे। एक तरफ पानी और दूसरी तरफ आग, पर आज पानी भी आग को नहीं बुझा पाया।

उसने मेरा लिंग मुँह में ले लिया और चूसने लगी। मैं भी उसकी चूचियों को चूसता रहा और चूत में ऊँगली करता रहा।

उसका बदन जलने लगा और कहने लगी- अब और न तड़पाओ मुझे। चोद दो इस चूत को। फाड़ दो इसे अपने फौलादी लंड से।

मुझसे भी अब रहा नहीं जा रहा था। मैंने उसकी कमर पर हाथ लगाया और उसकी चूत पर निशाना लगाते हुए अपना लंड आगे दिया। पर मेरा लंड किनारे हो गया। उसकी योनि काफी कसी थी। उसकी गुलाबी चूत शायद अभी तक कुंवारी थी। मैंने २-३ बार कोशिश की पर सफल नहीं हुआ।

फिर उसने मेरे लंड पर शैंपू लगाया और अपनी योनि पर भी। अब धीरे से उसने मेरे लंड को योनि के मुख पर टिकाया और मुझसे धक्का लगाने को कहा, वो खुद भी धक्का लगाने लगी। शैंपू की चिकनाहट के कारण लिंग योनि में सरकता चला गया।

आधा अन्दर जाते ही वो जोर से चिल्लाईई और बाहर निकालने के लिए कहने लगी।

मैंने अपने होंठ उसके होठों पर रख दिए और उसके स्तन दबाने लगा। धीरे-2 उसका दर्द कम हुआ, तभी मैंने लिंग को थोड़ा बाहर खींच कर पूरी ताकत से पेल दिया। वो तड़प उठी।

मैं फिर उसके होठों को चूमने लगा। धीरे-2 वो जोश में आने लगी और अपने चूतड़ उछाल-2 कर मजे लेने लगी। मैंने भी अपनी स्पीड बढ़ा दी।

करीब दस मिनट बाद वो झड़ गई और उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया पर मैं अभी भी लगा रहा।

पाँच मिनट बाद मैंने भी वीर्य की पिचकारी उसकी चूत में छोड़ दी और उसके ऊपर लेट गया।

तभी उसकी बहन अंशु वहाँ आ गई और कहने लगी- अब मेरी प्यास भी मिटा दो।

मैंने देखा सीमा वहीं शॉवर के नीचे पड़ी है और उसकी चूत से पानी और खून निकल रहा है।

मैंने सीमा को वहीं छोड़ा और अंशु के पास पहुँच गया।

जैसा मैंने पहले ही बताया था कि अंशु सीमा से भी ज्यादा सेक्सी माल थी और ऊपर से उसका गोरा रंग और गजब ढा रहा था।

मुझे ऐसा लगा की कोई परी मेरे सामने खडी है और कह रही है- आओ, मुझे चोद दो, मेरी चूत की प्यास बुझा दो।

मैंने उसे उठाया और बेड पर लिटा दिया और खुद उसके ऊपर लेट गया। उसने कसकर मुझे पकड़ लिया और उसकी चूचियों का नरम-2 एहसास मुझे अपने सीने पर होने लगा।

मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और चूसने लगा, धीरे से मैंने उसके होंठों को थोड़ा काट लिया। उसके पूरे बदन में आग लग गई, उसने भी मुझे चूमना शुरु कर दिया।

फिर मैंने उसे थोड़ा अलग किया और उसके स्तन दबाने लगा। वो भी मेरा लिंग दबाने लगी और लिंग को चूसना शुरु कर दिया। मेरा लंड फिर खड़ा हो गया। मैं भी उसकी चूत में ऊँगली डालने लगा और उसके स्तनों को चूसने लगा।

अंशु की योनि तो सीमा से भी मस्त और कसी थी। उसको देख कर ऐसा लगता था मानो भगवान् ने फुर्सत में उसे बनाया है।

तभी उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया और मैंने भी अपना वीर्य उसके मुँह में भर दिया, उसने पूरा वीर्य पी लिया और लिंग को चाट-2 कर साफ़ करने लगी।

मेरा लिंग एक बार फिर मैदान में आ गया और इस बार उसका निशाना सिर्फ अंशु की चूत थी। अंशु भी गरम हो गई थी और बार-2 मुझे छोड़ने का निमंत्रण दे रही थी।

मैंने उसकी गांड के नीचे तकिया लगाया और उसकी टांगों को अपने कंधे पर रख लिया। मुझे पता था कि अंशु की चूत भी अभी कुंवारी है इसलिए मैंने धीरे से उसकी योनि का मुँह फैलाया और उस पर लंड का सुपारा टिका दिया।

मैं उसके होंठों को चूमता रहा और एक उसके पुष्ट उरोजों को दबाते हुए हल्का सा झटका दिया और मेरा लंड आधा अंशु की चूत में पंहुच गया।

वो दर्द से चीख पड़ी पर मैंने उसे ज्यादा मौका नहीं दिया और उसके होंठों को चूसता रहा। उसकी झिल्ली फट चुकी थी, मैंने उसका कौमार्य भंग कर दिया था।

मैंने थोड़ा पीछे होते हुए पूरी ताकत से लंड उसकी चूत में डाल दिया।

वो तड़प उठी पर थोड़ी ही देर में उसे मजा आने लगा और वो चूतड़ उछाल-2 कर साथ देने लगी।

करीब 15 मिनट बाद वो झड़ गई। मैंने अपना लंड बाहर निकाला और उसे कुतिया की पोजिशन में कर दिया और फिर उसी तरह करीब आधे घंटे चलता रहा।

तभी उसने कहा- बबलू, अब मैं झड़ने वाली हूँ।

मैं भी झड़ने वाला था, मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी और हम दोनों एक साथ स्खलित हो गए। वो मुझसे चिपक गई और निढाल हो गई।

उस रात हम तीनों ने चुदाई के कई राउंड चलाये। जिसमें दो बार मैंने उन दोनों की गांड मारी और चूत को फाड़ कर भोंसड़ा कर दिया।

उसके बाद भी हमे जब भी मौका मिलता हम पूरा फायदा उठाते।

अंशु की चूत तो अब भी वैसी ही टाइट लगती है। कई बार मैंने उनकी सहेलियों के साथ भी सम्बंध बनाए।

पर यह अगली बार।

यह कहानी आप लोगों को कैसी लगी, जरूर बतायें, मुझे ईमेल करें !

chodu.aec@gmail.com

मेरी गर्लफ्रेंड दीपिका
प्रेषक : रणवीर संधु

दोस्तो, मेरा नाम रणवीर है, मैं अबोहर(पंजाब) शहर का निवासी हूँ। मैं आज पहली बार अपनी सच्ची कहानी आपके सामने पेश कर रहा हूँ। यह कहानी मेरी गर्लफ्रेंड दीपिका और मेरी है। आपका समय बर्बाद न करते हुए मैं कहानी शुरू करता हूँ।

मैं और मेरी गर्लफ्रेंड दीपिका एक दूसरे से बहुत प्यार करते थे। हमारी फ्रेंडशिप फ़ोन के जरिये हुई थी। एक महीने तक हमने एक दूसरे को देखे बिना केवल फ़ोन पर ही बात की। आखिर एक दिन हमारे मिलने का समय आ गया, मैंने उसे एक होटल में बुलाया।

वो देखने में इतनी सुन्दर नहीं थी। उसका रंग सांवला था लेकिन उसका फिगर "32-24-36" था। क्या मस्त लग रही थी वो ! उसके स्तन बड़े मस्त लग रहे थे। होटल में हम कुछ देर बैठे और मैंने उसे पहली बार चूम लिया, मैं 15 मिनट तक चूमता रहा और उसके वक्ष भी दबाता रहा। पहली बार मिलने पर तो सिर्फ उसने चूमने ही दिया लेकिन सेक्स के मामले में वो पूरी कठोर थी। कहती थी कि सेक्स तो हम शादी के बाद ही करेंगे !

फिर वो मेरे साथ ही पढ़ने लगी। हम इकट्ठे पढ़ाई के लिए जाने लगे। धीरे-धीरे मेरा उसके घर आना-जाना हो गया। उसके घर में केवल उसकी माँ रहती थी, उसके बाप का देहांत हो चुका था। उसके घर पर मैंने उसे बहुत बार चूमा, थोड़े दिनों के बाद मैं उसके स्तनों पर भी रोज़ किस करने लगा। मैं ही उसे पढ़ाई के लिए उसके घर से लेकर जाता और छोड़ने भी मैं आता। इसलिए मुझे मौका मिल जाता उसे किस करने का।

फिर एक दिन दोपहर का वक़्त था उसने मुझे फ़ोन किया कि रणवीर, मेरे घर पर कोई नहीं है, तुम पढ़ाई करने के बहाने मेरे घर आ जाओ।

मैं कुछ किताबें लेकर उसके घर पहुँच गया ताकि उसके आस-पड़ोस वालों को शक न हो। वो अपने कमरे मैं बैठी थी और उसने लोअर और टीशर्ट पहन रखी थी। बड़ी कयामत दिख रही थी वो ! फिर मैं उसके करीब गया और उसे चूमने लगा और तक़रीबन बीस मिनट तक मैंने उसे किस किया और उसकी चूचियाँ दबाता रहा। वो पूरी तरह गर्म हो गई थी और मुझसे पूरी तरह चिपक गई।

फिर मैंने मौका देखकर उसका लोअर नीचे कर दिया। उसने अन्दर कुछ नहीं पहन रखा था। उसकी चूत पर एक भी बाल नहीं था। मैंने उसकी चूत में उंगली डाल दी। फिर अचानक उसने मुझे अपने से दूर कर दिया और थोड़ा सा नाराज़ हो गई और कहने लगी- शादी से पहले यह ठीक नहीं !

और मैं चला आया वहाँ से।

मैं हर वक़्त उसे चोदने के सपने देखने लगा लेकिन वो तो साली मान ही नहीं रही थी। हमारे परीक्षाएं शुरू होने वाली थी, हमारी दोस्ती को छः महीने से ऊपर हो चुके थे लेकिन मैं अभी तक पूरी तरह चूत भी नहीं देख पाया था। लेकिन वो कहते है ना कि सब्र का फल मीठा होता है।

एक रात के 11 बज रहे थे और हम फ़ोन पर बात कर रहे थे तो मैंने उसे बातों बातों में कहा- दीपिका, मैं तुम्हें चोदना चाहता हूँ !

और वो भी झट से मान गई और कहने लगी- कोई जगह है क्या ?

तो मैंने कहा- हाँ ! मेरे एक दोस्त का कमरा है, वहाँ चलेंगे !

तो उसने कहा- ठीक है ! कल मैं सुबह 11 बजे पढ़ाई के बहाने घर से निकलूंगी और मुझे बता देना कि कहाँ आना है ! लेकिन कंडोम जरुर लेते आना !

मैंने सोचा कि कहीं वो मजाक कर रही है और नहीं आएगी !

लेकिन अगले दिन 11 बजे उसका फ़ोन आया और वो बोली- रणवीर, मैं घर से चल रही हूँ ! बोलो, कहाँ आना है ?

तो उस वक़्त मेरी ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं क्योंकि इससे पहले मैंने कभी किसी को नहीं चोदा था।

वो सही 11-30 बजे मेरे बताये हुए दोस्त के घर पर पहुंच गई। मैं और दीपिका कमरे में चले गए।

सबसे पहले तो मैंने उसे किस किया, वो भी मेरा साथ देने लगी। फिर धीरे-धीरे मैंने उसके सारे कपड़े उतार दिए। अब वो मेरे सामने केवल ब्रा और पैंटी में खड़ी थी और थोड़ा शरमा भी रही थी। फिर मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए और केवल अण्डरवीयर में खड़ा था। फिर मैंने उसकी ब्रा को उतार दिया और उसके स्तन चूसने शुरू किये। वो धीरे-धीरे गरम हो रही थी। उसके बाद मैंने उसकी पैंटी में हाथ डाला और उसकी चूत को सहलाने लगा। वो सिसकारियाँ भरने लगी। उसके बाद मैंने उसकी पैंटी भी उतार दी, अब वो मेरे सामने पूरी नंगी थी। उसकी चूत पर एक भी बाल नहीं था, कितनी मस्त चूत थी उसकी गुलाबी रंग की ! हाय !

फिर मैंने उसकी चूत पर अपनी जीभ लगाई तो उसने बड़ी जोर से सिसकारी भरी। मैं उसकी चूत को अपनी जीभ से रगड़ता रहा। उसकी चूत ने जल्द ही पानी छोड़ दिया।फिर मैंने अपना फनफनाता हुआ लंड बाहर निकाला तो वो देखकर डर गई और बोली- इतना मोटा मेरी छोटी सी चूत में कैसे जायेगा ? यह तो मेरी चूत फाड़ देगा ! मुझे तो बहुत डर लग रहा है !

तो मैंने उसे कहा- जान, तुम फिकर क्यों करती हो ! मैं हूँ ना ! मैं बड़े आराम से डालूँगा !

फिर मैंने कंडोम लगाया और उसकी चूत पर प्यार से अपने लंड को रगड़ने लगा। उसने अपनी आँखें बंद कर ली, सिसकारियाँ भरने लगी और कहने लगी- अब नहीं रहा जाता ! चोद दो जल्दी से मुझे। मैंने धीरे धीरे उसकी चूत में अपना लंड डालना शुरू किया। उसकी चूत की सील अभी टूटी नहीं थी इसलिये लंड अंदर घुस नहीं रहा था। फिर मैंने थोड़ा जोर लगाया और सुपारे को अन्दर करते ही उसने जोर से चीख मारी और कहने लगी- रणवीर, अपना लंड बाहर निकालो !बहुत दर्द हो रहा है।

मैंने उसके होंठ चूसने शुरू किये और थोड़ी देर बाद वो शांत हो गई। उसके बाद मैंने दुबारा जोर लगाया तो आधा लंड उसकी चूत में चला गया इस बार तो वो मुझे धकेलने लगी लेकिन मेरे होंठ उसके होंठों पर थे इसलिए वो चिल्ला नहीं पाई लेकिन वो मुझे धकेलने की नाकाम कोशिश करती रही।

उसके बाद उसके दोबारा शांत होने पर मैंने फिर जोर लगाया और इस बार पूरा लंड उसकी चूत में डाल दिया। इस बार तो जैसे उसकी जान ही निकल गई हो और वो रोने लगी लेकिन मैंने उसे दिलासा देते हुए कहा- जान रोओ मत ! बस अब दर्द नहीं होगा।

मैं उसे किस करता रहा, थोड़ी देर बाद वो शांत हो गई और मैं भी अपने लंड को उसकी चूत के अन्दर-बाहर करने लगा। अब उसे भी अच्छा लगने लगा था लेकिन थोड़ा दर्द तो उसे अब भी हो रहा था। फिर मैंने अपने धक्कों की गति बढ़ा दी और करीब बीस मिनट की चुदाई के बाद वो झड़ गई और उसने कस के मुझे पकड़ लिया। मैं भी उसके झड़ने के 5 मिनट बाद झड़ गया और तक़रीबन 15 मिनट हम एक दूसरे के ऊपर ऐसे ही लेटे रहे।

फिर उस दिन मैंने उसे तीन बार चोदा और फिर अंत में हमने एक दूसरे को चूमा और अपने घर आ गए।

उसके बाद मैंने उसे चार बार चोदा। फिर किसी कारण हमारी दोस्ती टूट गई। लेकिन आज भी जब वो मुझे कहीं देखती है तो मुझसे नज़रें नहीं मिला पाती। इसलिए दोस्तो मैं आपको एक हिदायत देता हूँ कि कभी किसी लड़की पर विश्वास मत करो। अगर हम उसे नहीं चोदेंगे तो वो हमें हमेशा धोखा ही देगी। इसलिए जब भी अपनी गर्लफ्रेंड को चोदने का मौका मिले तो उसे गंवाना मत।

और पंजाबी में एक कहावत भी है "सप्प ते फुदी जिथे मिले, मार देओ !"

दोस्तो अन्तर्वासना में मेरी इस कहानी को पढ़ने के बाद मुझे मेल अवश्य करें।

sandhuranveer@ymail.com

प्यास से प्यार तक-2
प्रेषक : मानस गुरू

तभी से मैं श्रीजा को पाने के लिए योजना बनाने लगा। कुछ दिन बाद समीर कुछ काम से अपने घर चला गया। यही मेरे लिए सोने पे सुहागा जैसा था। तो मैंने श्रीजा को चोदने की सारी योजना पर अमल करने लगा।

उस दिन मैं सुबह के करीब नौ बजे ही कॉलेज पहुँच गया और श्रीजा के आने का इन्तजार करने लगा। लगातार उसकी स्कूटी की आवाज की तरफ कान खड़े हुए थे। जैसे ही उसकी स्कूटी की आवाज आई, मैं कॉलेज के लाइब्रेरी में उसका इन्तजार करने लगा क्योंकि वो कॉलेज आते ही हर रोज पहले लाइब्रेरी जाती थी।

जब वो लाइब्रेरी आई तो मैं जाकर उसकी मेज़ पर उसके आगे बैठ गया। वो हमेशा की तरह एक मोम की गुड़िया जैसी लग रही थी। उसके गहरे नीले टॉप से उसकी चूचियों के उभार बाहर झाँक रहे थे। उसकी खूबसूरती के आगे जैसे मेरे मुँह में ताला लग गया था।

फिर मैंने उससे पूछा," श्रीजा, क्या पढ़ रही हो ?"

" मैथ्स !"

" मुझे तो मैथ्स का कुछ भी नहीं आता, क्या तुम मुझे कुछ प्रोब्लम्स समझा दोगी, जिससे मैं पास हो जाऊं?"

" हाँ, समझा तो दूँगी, मगर कब और कहाँ ?"

" अरे तुम हॉस्टल में आकर मुझे समझा देना।"

" ठीक है, कल तो सन्डे है, मैं सुबह पहुँच जाउंगी, ओके !"

" थैन्क्स, तो मैं कल तुम्हारा इन्तजार करूँगा, ओके बाय !"

तब मैं हॉस्टल चला आया और श्रीजा को चोदने के ख्याल से ही बेचैन हो रहा था। मेरा लंड तभी से खड़ा हो गया था और रोंगटे खड़े होने लगे थे। मैंने रात जैसे- तैसे काटी।

सुबह-सुबह मैं बाजार गया और कंडोम ले कर आया। फिर नहा कर फ्रेश होकर श्रीजा का इन्तजार करने लगा। करीब नौ बजे मेरे कमरे के दरवाजे के दस्तक हुई। मैंने जाकर दरवाजा खोला तो श्रीजा को अपने आगे पाया जिसको चोदने के सपने मैं करीब एक महीने से देख रहा था और आज वो सपना पूरा होने जा रहा था। यही सोच के सारे बदन पर अजीब सी मस्ती छा रही थी।

आज श्रीजा दूसरे दिनों से कुछ ज्यादा ही खूबसूरत नजर आ रही थी। उस दिन उसने पीले रंग का सलवार-सूट पहन रखा था। उस पर काले रंग का दुपट्टा ! उसे देख कर मैं तो यह भी भूल गया कि उसे अन्दर भी बुलाना है। करीब दस सेकंड बाद मुझे पता चला और मैंने श्रीजा को अन्दर बुला लिया।

उसे कुर्सी पर बैठने को कहा। वो आराम से बैठ गई। फिर मैंने उसे चाय पानी पूछा। उसने मना कर दिया।

तब श्रीजा ने मेरी तरफ देखा और मैथ्स की किताब लाने को कहा। मैं मैथ्स की किताब ले आया तो वो मुझे कुछ प्रोब्लम्स समझाने लगी। करीब 15 मिनट बाद मैंने बोला," काफी बोरिंग है ये मैथ और मैंने जाकर लैपटॉप ऑन कर दिया और उसे लाकर टेबल पे श्रीजा के सामने रख दिया।

तब मैं श्रीजा से बोला,"आज मैं तुम्हें कुछ दिखने जा रहा हूँ !" और मैंने लैपटॉप पर वो फ़िल्म चला दी।

खुद को वीडियो में देख के श्रीजा भौंचक्की सी रह गई। फिर जब समीर ने उसके कपड़े उतारने शुरु किए तो उसका चेहरा लाल हो गया। उसने शर्म के मारे अपना हाथ अपने चेहरे पर रख दिया। कुछ देर बाद वो फूट फूट के रोने लगी। उसने मेरे पैर पकड़ लिए और रोते हुए बोली," देव, तुमने तो मुझे कहीं का नहीं छोड़ा, मेरे मम्मी पापा यह जान गए तो खुदकुशी कर लेंगे। ये तुम और किसी को मत दिखाना प्लीज़ ! तुम्हें हमारी दोस्ती की कसम !"

"दोस्ती है, तभी तो अब तक किसी को नहीं दिखाया, लेकिन अगर तुमने वो नहीं किया जो मैं चाहता हूँ तो कल तक यह वीडियो सारी दुनिया देखेगी।"

" क्या करना होगा मुझे? मैं कुछ भी करने के लिए तैयार हूँ !"

" तुम्हें मेरे साथ वही करना होगा, जो तुमने समीर के साथ इस वीडियो में किया है।"

" क्या? तुम इतने गिरे हुए इंसान हो, मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था !"

" मुझे और नीचे गिरने में ज्यादा देर नहीं लगेगी !"

तब श्रीजा कुछ देर खामोश रही जैसे पत्थर की मूरत बन गई हो और फिर मेरे बिस्तर पर आकर बैठ गई, अपना दुपट्टा नीचे गिरा कर बोली," कर लो जो करना है !"

मैं तो पूरा मज़ा लूटने के मूड में था, इसलिए बोल दिया," तुम्हें मेरा पूरा साथ देना होगा, जैसे तुमने समीर का साथ........."

तब मैं आगे बढ़ा और अपना हाथ श्रीजा के लबों पर रख दिया, वो फूल से कोमल तो थे लेकिन शोलों सी गर्मी थी उनमें !

मुझे लग रहा था जैसे वो रस के भंडार हैं और मैं उसकी बूँद बूँद पीने के लिए बेताब हुआ जा रहा था। फिर मैंने अपने लब उसके लबों पे रख दिए और धीरे धीरे लबों को काटने और चूसने लगा। मेरी और उसकी जबान टकराने लगी।

जैसा कि मैंने पहले ही उसे बोल दिया था, उसे भी साथ देना पड़ा। वो मेरे बालों को सहलाती जा रही थी।

फिर मैंने अपना दायाँ हाथ उसके भरे हुए सीने के ऊपर रख दिया तो वो जैसे चौंक सी गई। दूसरे हाथ से मैं उसकी पीठ सहलाता जा रहा था। मैं उसकी मदमस्त जवानी को पूरी तरह से अपने रोम-रोम में महसूस करना चाहता था।

कुछ देर बाद मैंने धीरे से उसका कमीज़ उतार दिया। अन्दर श्रीजा की चूचियों को एक काले रंग की ब्रा जकड़े हुए थी। उसके बोबे ब्रा के बंधन से छूटने के लिए उतावले मालूम पड़ रहे थे। मैं उन पहाड़ियों की कोमल और रेशमी दुनिया में खो जाना चाहता था।

लेकिन मैंने जल्दबाजी ना करते हुए धीरे धीरे आगे बढ़ने का फ़ैसला किया।

मैंने फिर उसकी ब्रा के उपरी हिस्से से झांकती चूचियों को चूम लिया और चाटने लगा। फिर मैंने ब्रा के ऊपर से ही चूचियों को खूब मसला। श्रीजा की सिसकारियाँ छूटनी शुरु हो गई थी। वो ना चाहते हुए भी मेरी इस हरकतों से धीरे धीरे गर्म होने लगी थी।

मैंने श्रीजा के पूरे बदन को अपने लबों से छुआ। श्रीजा इससे मचलने लगी। उसके नाभि पर चुम्बन लिया तो जैसा पूरे बदन में कंपकंपी सी दौड़ गई।

अब मैंने उसकी पहाड़ियों को आजाद करने का सोचा और उसकी ब्रा का हुक पीछे से खोल दिया। अब श्रीजा मेरे आगे आधी नंगी थी। उसकी जवानी मेरे आगे अंगडाई भर रही थी। उसके मोमे जैसे मुझे बुला बुला के बोल रहे हों," आओ, हमें अपने हाथों से पुचकारो, अपने होठों से दुलारो, और हमारा रस पी जाओ !"

मैं श्रीजा के दाईं चूची के चुचूक को चूसने लगा और बाईं को अपनी हाथ से पुचकारने लगा।

श्रीजा आँखें मूँद कर गहरी सांसें भर रही थी।

फिर मैंने अपना टी-शर्ट उतार दिया। मेरा बदन देख कर श्रीजा की आँखें जैसे फटी रह गई, क्योंकि मेरा बदन समीर से काफी ज्यादा कसा हुआ और मरदाना था।

फिर मैंने श्रीजा की पैंट उतार दी। अब उसके शरीर पर एक पैंटी ही बची थी।

उसकी टांगें जैसे किसी कारीगर की सालों की मेहनत के बाद बनी मूर्ति की भाँति लग रही थी, एक भी दाग या खराबी नहीं थी उनमें !

फिर मैं श्रीजा की टांगों को चूमता गया और श्रीजा सीसकारियाँ लेती रही।

मैंने अब अपनी पैंट भी उतार दी। मेरा लंड तो कब से खड़ा होकर अन्दर से पैंट फाड़ के बाहर आने को बेताब हो रहा था। पैंट खोलते ही लंड एक नुकीले चीज की तरह चड्डी को सामने धकेल रहा था, यह देख कर श्रीजा शरमा सी गई।

फिर मैं श्रीजा के पैंटी की तरफ बढ़ा और उसे उतारने लगा तो श्रीजा ने मेरे हाथ पकड़ लिए। लेकिन मैंने उसकी पैंटी को टांगों के रास्ते उतार दिया।

श्रीजा ने अपना चेहरा दोनों हाथों से ढक लिया।

मैंने जिसको ख्वाबों में इतनी बार चोदा था आज वो मेरे आगे पूर्ण नग्नावस्था में पड़ी थी और मुझे जन्नत की सैर कराने के लिए तैयार थी। उसकी दोनों टांगों के बीच तिकोने आकार में छोटे छोटे बालों का एक जंगल था और उसके नीचे थी दो गुलाबी पंखुड़ियाँ और उनके बीच जन्नत में दाखिल होने के लिए छोटा सा रास्ता ! उसे देखते ही मेरा मन जल्दी से जन्नत देखने को उतावला होने लगा। अब मैंने अपनी चड्डी उतार दी और मेरी सात इन्च का लंड तना हुआ खड़ा था। लंड को देखकर श्रीजा के चेहरे पर कुछ बेताबी और घबराहट के निशान नजर आने लगे क्योंकि समीर का लंड मेरे इतना न ही लंबा था और न ही मोटा।

मैं श्रीजा की जांघ की भीतरी चिकनी सतह को चाटता गया और श्रीजा के पूरे बदन में सिहरन सी दौड़ने लगी।

अब मैं धीरे-धीरे श्रीजा के उस अंग के ओर बढ़ चला जो कि एक लड़की की सबसे अनमोल चीज़ होती है, मैं उसे आज लूट लेना चाहता था। उसकी चूत से मदहोश करने वाली गंध आ रही थी।

मैं धीरे धीरे आगे बढ़ा और चूत की एक पंखुड़ी को अपनी होंठों के बीच लेकर थोड़ा भींच लिया और श्रीजा जैसे तड़प सी उठी। मैंने दोनों पंखुड़ियों को कई बार ऐसा किया और हाथों से मसला भी। अब मैं श्रीजा की भग-कलि को मसलने लगा और श्रीजा और जोर जोर से मचलने लगी और सिसकारियाँ भरने लगी। उसकी चूत थोड़ा थोड़ा पानी छोड़ने लगी थी।

अब मैं समझ गया कि वो आखिरी पल आ गया है जिसका इन्तजार मैं इतने दिनों से कर रहा था। मैं आगे बढ़ा और मेरा पूरा शरीर श्रीजा के शरीर के ऊपर आ गया। उसके स्तन मेरी बालों भरी मरदाना छाती के नीचे दबे हुए थे। मैंने दोनों चूचियों को कुछ देर तक होंठों से चूसा।

अब श्रीजा की बेताबी चरम पर पहुँच चुकी थी। मैंने अब अपने लण्ड का सुपारा उसकी छोटी सी चूत के आगे रखा और धीरे धीरे अन्दर धकेलने देने लगा। श्रीजा थोड़ा चिल्लाई और मेरा सुपारा उसकी चूत के अन्दर था।

श्रीजा की चूत अन्दर से मक्खन की तरह चिकनी, नर्म और काफी गीली थी और काफी गर्म भी थी। मुझे जन्नत दिखाई देने लगी थी। अब बिना किसी कोशिश के ही धीरे-धीरे लंड चूत के अन्दर और अन्दर घुसता ही जा रहा था। कुछ देर बाद लंड और अन्दर नहीं गया तो मैंने थोड़ा जोर लगाया और श्रीजा दर्द से चीख उठी। मेरा लंड अब पूरा का पूरा श्रीजा के अन्दर था।

श्रीजा की चूत ने मेरे लंड को जकड़ रखा था। वो अनुभव शब्दों में बयान नहीं जा सकता। खुद का लंड किसी चूत में जाने से ही पता लग सकता है असली चूत का मज़ा।

अब मैं धीरे-धीरे लण्ड को को अन्दर-बाहर करने लगा। श्रीजा की चूत काफी गीली हो चुकी थी इसलिए लंड आसानी से अन्दर-बाहर हो रहा था। मैंने करीब दस मिनट तक श्रीजा को उसी तरह चोदा।

फिर मैंने उसे चौपाये की अवस्था में आने को कहा और पीछे से उसके चूत में अपना लौड़ा डाला। इस अवस्था में और ज्यादा मज़ा आने लगा। बीच-बीच में मैं आगे झुक के उसके स्तनों को जकड़ लेता और श्रीजा सिसकार उठती। मैं उसके पीठ पर चुम्बन किए जा रहा था।

करीब 15 मिनट तक चोदने के बाद हम दोनों फिर से पहले वाली अवस्था में आ गये। अब मैं कंडोम ले आया शेल्फ से और पहन लिया। मैं नहीं चाहता था कि मेरी वजह से श्रीजा को कोई मुसीबत झेलनी पड़े।

कंडोम पहनने के बाद मैंने फिर से मेरा लंड श्रीजा के चूत में डाला और पहले धीरे-धीरे, फिर जोर-जोर से चोदने लगा। श्रीजा भी अब अपनी मंजिल की तरफ बढ़ने लगी। करीब दस मिनट बाद मेरे लंड पर श्रीजा की चूत का दवाब अचानक बढ़ गया और श्रीजा निढाल हो गई।

मैंने अब भी जोर जोर से चोदना चालू रखा और कुछ देर बाद अपना सारा माल कंडोम के अन्दर गिरा दिया।

कुछ देर तक हम दोनों वैसे ही पड़े रहे बिस्तर पर !

हम दोनों पसीने से तर-बतर हो चुके थे। फिर मैंने धीरे से अपना लंड श्रीजा की चूत से निकाला, खड़ा हो गया, श्रीजा के होठों पर एक चुम्बन करके चला आया। मैंने कंडोम उतारा और बाथरूम चला गया।

कुछ देर बाद बाहर आया और श्रीजा को अन्दर जाने के लिए बोल दिया। श्रीजा अन्दर गई और नहा कर बाहर आई। अब मैंने अपने कपड़े पहन लिए थे। श्रीजाने भी अपने कपड़े पहन लिए। फिर श्रीजा मुझसे बिना कुछ कहे बाहर निकल गई।

उसके कुछ दिन बाद तक वो कॉलेज नहीं आई। मैं घबरा गया था, कहीं वो कुछ कर तो नहीं बैठी। फिर सात दिन बाद समीर लौट आया और श्रीजा भी कॉलेज आने लगी, लेकिन वो जब भी मुझे देखती उसका खिला सा चेहरा मुरझा जाता और उसमें नफरत साफ झलकती थी।

पहले कुछ दिन तो श्रीजा और समीर के बीच सब कुछ सामान्य था लेकिन समीर का मन अब श्रीजा से ऊब चुका था और वो एक नई लड़की के पीछे लग गया था।

श्रीजा को समीर का सब सचाई तब पता चली जब एक दिन उसने समीर को उस लड़की को चूमते हुए पकड़ लिया। अब वो काफी उदास रहने लगी और कॉलेज भी आना काफी कम कर दिया उसने।

एक दिन मैं शाम को नदी किनारे टहल रहा था कि अचानक कुछ पानी में गिरने की आवाज़ आई। मैंने देखा तो एक लड़की पानी में डूब रही थी। मैं क्यूंकि एक अच्छा तैराक हूँ, मैं भी पानी में कूदा और उस लड़की को किनारे तक लाया। मैं पानी में अंधेरे की वजह से उसका चेहरा नहीं देख पाया था। जब किनारे उसको लिटाया तो यह देख कर मेरी आँखें फटी की फटी रह गई कि वो कोई और नहीं बल्कि श्रीजा ही थी। पेट में पानी भर जाने से वो बेहोश थी।

मैंने उसे कुछ लोगों की मदद से पास के हस्पताल पहुँचाया। कुछ देर बाद श्रीजा को होश आया। मैं जब उसके सामने गया तो वो पहले चौंकी और अपना चेहरा फेर लिया। डॉक्टर साब ने तब बताया कि मैंने ही उसकी जान बचाई है और डॉक्टर साब बाहर चले गए।

तब श्रीजा ने मुझसे पूछा,"क्यूँ बचाया मुझे ? जिसको सब कुछ दे दिया वो तो हाथ छोड़ के चला गया, तो फिर जिंदगी का हाथ थामने से क्या फायदा !"

मैंने तब कहा,"समीर तो तुम्हारे प्यार के लायक था ही नहीं, लड़कियों के जिस्म से खेलना तो उसका शौक है और उस पर अपनी जिंदगी कुर्बान कर देना कोई समझदारी की बात नहीं ! तुम्हारे घर में और भी कई जिम्मेदारियाँ हैं जो तुम्हें निभानी हैं।"

मेरी बातें सुन कर वो कुछ हद तक सही हुई। करीब दो घंटे बाद डॉक्टर साब ने एक बार फिर चेकअप किया और डिस्चार्ज कर दिया। श्रीजा को मैंने ऑटो मैं बिठाया और उसके घर छोड़ दिया।

उसके दूसरे दिन से श्रीजा रोज कॉलेज आने लगी और मेरी और श्रीजा की अच्छी दोस्ती हो गई। अगले कुछ महीनो में दोस्ती प्यार में कैसे तबदील हो गई, ये हम दोनों में से किसी को पता भी नहीं चला।

आज मैं और श्रीजा एक ही कॉलेज में एम बी ए की पढ़ाई कर रहे हैं। श्रीजा एक गायिका बन चुकी है और उसकी कई सारी म्यूजिक ऐल्बम आ चुके हैं।

हम दोनों एक दूसरे को आज भी उतना ही प्यार करते हैं जितना की शुरुआत में करते थे, बल्कि धीरे-धीरे प्यार और गहरा हुआ है और श्रीजा और मैंने शादी करने का भी फ़ैसला किया है लेकिन अभी नहीं, कहीं अच्छी सी नौकरी लगने के बाद !!!

आशा है कि अन्तर्वासना डॉट कॉम पर प्रकाशित यह कहानी आपको अच्छी लगी होगी।

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आंटी का मीठा मीठा दर्द
प्रेषक : राज मेहता

हाय दोस्तो, मुझे हिंदी लिखनी नहीं आती पर कोशिश कर रहा हूँ, मेरी गलतियों को नज़रान्दाज़ कर दें।

मेरा नाम राज है, मैं इन्दौर का रहने वाला हूँ। मैं जब भी अपने घर जाता था तो हमेशा पड़ोस की आँटी को चोदने के बारे में सोचता रहता था।

इस बार जब मैं अपने घर गया तो मेरे ऊपर कृपा हो ही गई, मुझे चोदने का मौका मिल ही गया। मैं जिम जाने लगा था जिसका असर मुझे घर पर मालूम चला। आँटी के पति दुबले पतले थे और दिन भर को़र्ट में रहते थे।

उस दिन आँटी का हीटर ख़राब हो गया था। हमारे शहर में कई लोग हीटर पर खाना बनाते हैं। आँटी का भी खाना नहीं बना था, मैं गाय को रोटी देने बाहर आया तो आँटी बोली- राज, मेरा हीटर खराब हो गया है, उसे सुधार दो !

मैंने मजाक में कहा- आप तो खुद ही इतनी गर्म हो कि तपेली को हाथ से पकड़ लो तो पानी भाप बन जाये !

वो हंस दी, मैंने आज तो रास्ता साफ समझा और उनका हीटर सही करने उनके घर आ गया। उनकी लड़की जो दसवीं में है, स्कूल जा रही थी।

मैं हीटर को सही करने लगा, उनसे टेस्टर माँगा तो वो उसे लेकर खुद ही हीटर की स्प्रिंग को चैक करने लगी। तब उनके बड़े बड़े स्तन उनके ब्लाउज़ से बाहर दीखने लगे थे। मन तो कर रहा था कि उनके स्तनों को पकड़ कर मसल डालूँ पर मर्यादा मुझे रोक रही थी।

तब मैंने उनसे टेस्टर लेना चाहा तो उनका हाथ मेरे हाथ से छू गया। मुझे लगा कि आँटी इतनी हॉट हैं, अंकल की तो रोज जन्नत की सैर है।

मैंने जब स्प्रिंग से टेस्टर छुआ तो मेरे आँटी के ख्यालों के चक्कर में मुझे करंट का एक झटका लगा, मैं लगभग बेहोश हो गया था। आँटी घबरा गई और उन्होंने पानी लाकर मेरे ऊपर डाला और मुझे अपनी गोद में ले लिया और मुझे उठाने लगी।

मेरा सीना एकदम उभरा था जो शर्ट का बटन खुला होने से आँटी को दिख रहा था। आँटी ने अपना एक हाथ मेरी शर्ट में डाल दिया और धीरे-धीरे मेरे सीने पर फ़िराने लगी।

मुझे होश आने लगा था, आँटी बड़े प्यार से अपना गर्म हाथ मेरे 40 इंच के सीने पर घुमा रही थी।

मेरा लंड घोड़े के लंड की तरह धीरे धीरे बढ़ने लगा था जो मेरे रीबोक की चड्डी से बाहर निकलने को तरस रहा था और आँटी मेरे सीने को रगड़े जा रही थी।

अब मुझसे सब्र नहीं हो रहा था, मैंने अपनी आंख खोल दी। वो एकदम से मुझसे अलग हो गई।

मैंने बोला- आँटी करो ना ! मुझे मजा आ रहा है।

उसने पूछा- पहले कभी सेक्स नहीं किया ?

मैंने मना कर दिया- नहीं !

मेरा दिमाग गर्म हो रहा था कि अगर आज सेक्स नहीं कर पाया तो मैं मर जाऊँगा।

वो शायद मेरी अवस्था समझ चुकी थी, वो मेरे पास आई और हाथ को चूमने लगी। मुझे कुछ होने लगा था। उसने धीरे से मेरे माथे को चूम लिया। मेरा लंड जोर जोर से सांस ले रहा था। आँटी की भी सांसें गर्म होने लगी थी। फिर वो मेरी दोनों आँखों को चूमने लगी। मेरी तो हवा ख़राब होने लगी थी। वो इतनी गोरी थी कि अगर हाथ रख दो तो लाल हो जाये।

उसने मेरे दोनों हाथ अपने वक्ष पर रख दिए और बोली- इनको दबाओ !

वो मुझे अनाड़ी समझ रही थी। मैंने अपने हाथ उसके नर्म-नर्म बोबों पर घुमाने शुरु कर दिए। वो मचलने लगी और मेरे मसल्स को सहलाने लगी।

मैंने धीरे से उसकी साड़ी के अंदर अपना हाथ डाल दिया और उसकी चूत के दाने को छू लिया।

वो सिसकने लगी और बोली- तेरे अंकल को तो कोर्ट से ही समय नहीं है, मैं सात महीने से अपनी प्यास मोमबत्ती या अपने हाथ से मिटा रही हूँ। मेरी प्यास बुझा दे, तेरा मुझ पर उपकार होगा।

मैं उसकी चूत को रगड़े जा रहा था, उसने भी मेरे लंड को पकड़ लिया और रगड़ने लगी। मैंने उसके पेट पर हाथ रखा तो वो स्प्रिंग की लहरों की तरह हिलने लगा। अब हमारी धड़कने बढ़ चुकी थी। मैंने अपना लंड उसके कहने पर उसके दोनों बोबों के बीच रख दिया। मैं तो जैसे जन्नत में पहुँच गया था।

उसके बाद वो मुझसे बोली- लंड को धीरे-धीरे आगे पीछे करो !

मेरी उत्तेजना की सीमा पार हो रही थी, साथ ही मजा भी बढ़ता जा रहा था। मेरी सांसें तेज होने लगी थी। मेरा लंड ठीक उसके मुँह के पास आ जा रहा था। वो अपनी जीभ से उसे चाटने की कोशिश कर रही थी, मुझे बड़ा मजा आ रहा था। मेरा लंड जैसे दो रुई के गोलों के बीच में हो जिनको हल्का गर्म कर दिया हो।

तभी वो जोर जोर से चिल्लाने लगी- और जोर लगाओ अह अहअहहहह अहह हहहहहहह ...........

उसने मेरे कूल्हे कस कर पकड़ लिए और एकदम ढीली हो गई .....

lovebycall@gmail.com

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